कांग्रेस की मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार और राहुल गांधी की पुरानी टीम से आने वाली मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने चुनाव प्रक्रिया के बीच हस्तक्षेप नहीं करने की दलील देते हुए कांग्रेस को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दायर कर अपनी चुनौती जारी रखने की सलाह दी है. हालांकि, नामांकन खारिज होने से चर्चा में आई मीनाक्षी को पार्टी ने पंजाब में अहम पद सौंपा है.

कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को "अवैध, पक्षपातपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण" करार देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

सिंघवी के अनुसार, कानून की नजर में किसी आपराधिक मामले को तभी लंबित माना जाता है जब अदालत उस पर संज्ञान ले और आगे की कार्रवाई शुरू कर दे. उन्होंने तर्क दिया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें आरोप तय हो चुके हों और दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो. ऐसे में नटराजन पर जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह निराधार है.

अदालत ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज करते हुए कहा कि नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर (RO) द्वारा खारिज किए जाने के मामलों में अदालत आमतौर पर हस्तक्षेप नहीं करती. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उम्मीदवार के पास चुनावी कानून के तहत उपलब्ध उपाय अपनाने का ही रास्ता होता है.

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए. एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा, “हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं” और याचिका खारिज कर दी. हालांकि अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को यह स्वतंत्रता दी कि वे चुनाव परिणाम के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के तहत याचिका दायर कर अपनी चुनौती जारी रख सकती हैं.

कांग्रेस ने सौंपी जिम्मेदारी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीनाक्षी नटराजन को पंजाब का एआईसीसी (AICC) पर्यवेक्षक बनाया है. साथ ही वरिष्ठ नेता अजय माकन और भजनलाल जाटव को भी उनके साथ तैनात किया गया है. यह पूरी टीम पंजाब कांग्रेस के नेताओं से रायशुमारी करने के बाद अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी और उसे सीधे पार्टी हाईकमान को सौंपेगी. इसी रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर संगठन और राज्य इकाई में बड़े बदलावों पर अंतिम फैसला लेगा.

मीनाक्षी इससे पहले तेलंगाना में भी पदभार संभाल चुकी हैं. ऐसे में उन्हें गुटबाजी से त्रस्त पंजाब कांग्रेस को सुलझाने और चुनावों के लिए तैयार करने भेजा गया है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही में हुए राज्यसभा प्रकरण के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.

आज जंतर-मंतर पर कांग्रेस का प्रदर्शन

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के विरोध में आज कांग्रेस जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन भी कर रही है.

"कांग्रेस की मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार और राहुल गांधी की पुरानी टीम से आने वाली मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है…"