भारतीय बैंकिंग सेक्टर में इस वक्त जमा (Deposits) और कर्ज (Bank Credit) दोनों के मोर्चे पर जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 31 अगस्त 2026 तक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 'Scheduled Commercial Banks' में कुल डिपॉजिट ₹27.87 लाख करोड़ के आंकड़े पर पहुंच गया है.

सालाना आधार पर देखें तो बैंक जमा में 17.8% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि आम जनता से लेकर बड़े संस्थानों तक, लोग बैंकों में तेजी से पैसा बचा रहे हैं.

एफडी (FD) का दबदबा: Time Deposits में बंपर उछाल

बैंकों में जमा कुल रकम को मुख्य रूप से दो हिस्सों में देखा जा सकता है:

Time Deposits (FDs आदि): कुल ₹24.42 लाख करोड़

बैंकिंग सिस्टम में जमा का सबसे बड़ा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी निश्चित अवधि वाली योजनाओं में है. पिछले एक साल के भीतर Time Deposits में करीब ₹3.65 लाख करोड़ का भारी इजाफा दर्ज किया गया है.

Demand Deposits (Savings & Current Account): करीब ₹3.45 लाख करोड़ .यह वह पैसा है जिसे ग्राहक अपनी दैनिक जरूरतों के हिसाब से कभी भी निकाल सकते हैं.

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कर्ज बांटने में भी आगे रहे बैंक: 19.1% बढ़ा Bank Credit

जमा स्वीकार करने के साथ-साथ बैंकों ने कर्ज देने की अपनी रफ्तार भी काफी तेज रखी है. 31 अगस्त 2026 तक कुल बैंक क्रेडिट बढ़कर ₹22.39 लाख करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 19.1% अधिक है.

कहां गया सबसे ज्यादा लोन?

Non-Food Credit (उद्योग, व्यापार, पर्सनल लोन): ₹22.28 लाख करोड़

बैंक क्रेडिट में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इसी सेक्टर की रही. सालाना आधार पर इसमें ₹3.52 लाख करोड़ की बढ़ोतरी देखी गई.

Food Credit: ₹1.12 लाख करोड़

खाद्यान्न संबंधी कर्ज के क्षेत्र में भी सालाना आधार पर करीब ₹66,461 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई.

आम आदमी और आपकी जेब पर क्या होगा असर?

 बैंकों के पास जमा राशि बढ़ने का मतलब है कि उनके पास होम लोन, ऑटो लोन, बिजनेस लोन और पर्सनल लोन देने के लिए पर्याप्त फंड (Liquidity) उपलब्ध है. सिर्फ क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने से ब्याज दरें कम नहीं होती हैं. लोन कितना सस्ता या महंगा होगा, यह मुख्य रूप से RBI की मॉनेटरी पॉलिसी, बैंकों की अपनी लागत और लोन लेने वाले व्यक्ति के क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर करेगा.

 

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