भारत की अर्थव्यवस्था की अप्रैल-जून 2026 तिमाही में वास्तविक GDP Growth 7.8% रही. आंकड़ा उम्मीद से बेहतर रहा, लेकिन इसके साथ ही GDP की गणना और पिछले साल के आंकड़ों में हुए संशोधन को लेकर बहस भी शुरू हो गई है.

इस बहस के केंद्र में पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग हैं. गर्ग ने 7.8% की Growth को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले साल के GDP आंकड़े में बड़े बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनके हिसाब से अगर पुराने आंकड़े को आधार बनाया जाए तो मौजूदा Growth की तस्वीर काफी अलग दिखाई देती है. 

इसी तर्क को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा. लेकिन सरकार ने इन सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि 7.8% की GDP Growth की गणना सही तरीके से हुई है और आलोचना में अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों को आपस में मिलाया जा रहा है.

₹86.05 लाख करोड़ से ₹80 लाख करोड़ कैसे पहुंची GDP?

विवाद की शुरुआत Q1 FY2025-26 के GDP आंकड़े से होती है. पुरानी GDP सीरीज, जिसमें 2011-12 को आधार वर्ष माना गया था, उसमें Q1 FY2025-26 की GDP ₹86.05 लाख करोड़ थी. लेकिन नई GDP सीरीज में आधार वर्ष बदलकर 2022-23 कर दिया गया. नई सीरीज में यही आंकड़ा पहले ₹80.32 लाख करोड़, फिर ₹80.44 लाख करोड़ और बाद में नए IIP और PPI आंकड़े शामिल होने के बाद ₹80 लाख करोड़ किया गया.

यहीं से सवाल उठा कि क्या पिछले साल की GDP को कम करने से इस साल की Growth Rate ज्यादा दिखाई गई?

सरकार का जवाब है- नहीं.

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय यानी MoSPI का कहना है कि ₹86.05 लाख करोड़ पुरानी GDP सीरीज का आंकड़ा है, जबकि मौजूदा GDP नई सीरीज के आधार पर तैयार की गई है. इसलिए दोनों को सीधे तुलना करना सांख्यिकीय रूप से सही नहीं है.

सरकार के मुताबिक सही तुलना नई सीरीज के आंकड़ों के बीच होनी चाहिए. Q1 FY2026-27 की GDP ₹88.27 लाख करोड़ है और इसकी तुलना नई सीरीज में Q1 FY2025-26 की ₹80.32 लाख करोड़ GDP से की जानी चाहिए.

ये भी पढ़ें: ITR Refund आना हो गया है शुरू, ऐसे पता करें कहां अटका है आपका पैसा

फिर 7.8% Growth कैसे निकली?

सरकार के अनुसार नई सीरीज में Q1 FY2025-26 की Real GDP ₹75.46 लाख करोड़ थी, जो Q1 FY2026-27 में बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ हुई। इससे वास्तविक GDP Growth 7.8% निकलती है. इसी अवधि में Nominal GDP ₹80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ हुई, यानी Nominal Growth करीब 10.3% रही.

सरकार का तर्क है कि 7.8% वास्तविक GDP Growth और 2.6% Growth एक ही तरह की तुलना से नहीं निकली हैं. 2.6% निकालने के लिए नई सीरीज के मौजूदा आंकड़े की तुलना पुरानी सीरीज के आंकड़े से की जा रही है. सरकार इसे सांख्यिकीय रूप से गलत तुलना मान रही है.

CPI 3.9%, WPI 9% से ज्यादा और GDP Deflator सिर्फ 2.5% क्यों?

यह सवाल भी GDP बहस में अहम है. सरकार का कहना है कि CPI, WPI और GDP Deflator एक ही चीज को नहीं मापते. CPI आम उपभोक्ता द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को मापता है.

WPI मुख्य रूप से थोक स्तर पर वस्तुओं और कच्चे माल की कीमतों को देखता है. जबकि GDP Deflator पूरी अर्थव्यवस्था में पैदा हुए मूल्य को देखता है. इसमें सरकारी खर्च, निवेश, निर्यात और Banking, IT तथा Real Estate जैसी सेवाएं भी शामिल होती हैं.

इसलिए CPI और WPI में ऊंची महंगाई होने के बावजूद GDP Deflator का आंकड़ा अलग हो सकता है. कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में अप्रैल में 69.5%, मई में 72.2% और जून में 33.7% की वृद्धि दर्ज की गई. इसका मतलब है कि उत्पादन की वास्तविक तस्वीर कमजोर थी, लेकिन कीमतों में तेज वृद्धि के कारण Nominal GVA काफी ऊपर चला गया।

बहस अभी खत्म नहीं हुई है

GDP विवाद में एक तरफ पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और विपक्षी नेताओं ने आंकड़ों की तुलना और संशोधन पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस नेताओं, जिनमें जयराम रमेश और पवन खेड़ा शामिल हैं, ने भी इन सवालों को राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाया है.

दूसरी तरफ सरकार GDP आंकड़ों का बचाव कर रही है. MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने कहा है कि पुराने आंकड़ों में संशोधन नई पद्धति, नए डेटा स्रोत और बेहतर मूल्य सूचकांकों को शामिल करने का नतीजा है. उन्होंने अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों को मिलाकर Growth निकालने की आलोचना की है.

सरकार का कहना है कि नई GDP सीरीज में ज्यादा विस्तृत Price Indices और नई गणना पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया है. इसलिए पुराने और नए आंकड़ों को सीधे मिलाकर Growth Rate निकालना सही नहीं है.

 

ये भी पढ़ें: महंगाई की मार : चार महीने में CPI 3.48% से 4.45% पर, खाद्य महंगाई 5.52%; गांवों पर शहरों से ज्यादा

"भारत की अर्थव्यवस्था की अप्रैल-जून 2026 तिमाही में वास्तविक GDP Growth 7.8% रही. आंकड़ा उम्मीद से बेहतर रहा, लेकिन इसके साथ ही GDP की गणना औ…"