पश्चिम बंगाल की राजनीति में टूट रही तृणमूल को समेटने और टूट को रोकने, ममता कांग्रेस के दायरे में लौट सकती हैं. तृणमूल और कांग्रेस के संभावित विलय पर सोनिया गांधी और ममता बनर्जी विचार कर रही हैं. सूत्रों के हवाले से रम रही अटकलों में यह भी चर्चा है कि ममता को संयुक्त पार्टी का उपाध्यक्ष भी बनाया जा सकता है.
ममता जाएंगी लोकसभा
बंगाल चुनाव हारने के बाद ममता किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं. इस स्थिति में दो अटकलें चल रही हैं. पहली, ममता बंगाल की किसी लोकसभा सीट पर कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ सकती हैं.
राज्यसभा
दूसरी स्थिति राज्यसभा की है. खबरों के मुताबिक बुधवार को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और वरिष्ठ सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है. इस बैठक के सूत्रों के हवाले से जो खबर आई है उसके मुताबिक अभिषेक ने बुआ ममता को राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव राहुल के सामने रखा है.
गौरतलब है कि बंगाल में मची उथल-पुथल के बीच, ममता को इंडिया गठबंधन और अपनी पुरानी मैडम सोनिया की याद आ गई है. इसी क्रम में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से लंबी चर्चा की है.
कांग्रेस से ही शुरू हुआ था ममता का राजनीतिक सफर
दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर कांग्रेस से ही शुरू हुआ था. 1970 के दशक में वह कांग्रेस की छात्र और युवा राजनीति से जुड़ीं और 1984 में पहली बार लोकसभा पहुंचीं थीं. गौरतलब है कि ममता की कांग्रेस में चली दो दशक की पारी, राजीव गांधी की छत्रछाया में ही पनपी. कांग्रेस पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ममता को राजीव अपनी बहन मानते थे. इसी दौरान सोनिया गांधी के साथ भी ममता के संबंध आत्मीय थे.
हालांकि, बाद में कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने 1998 में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थापना की थी. दिलचस्प बात यह है कि इसी साल सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में उतरी थीं. बीते 28 सालों में ममता ने कांग्रेस के खिलाफ काफी तल्ख राजनीति की है. महज दो साल पहले कांग्रेस के नेतृत्व को मानने से ममता ने इनकार कर दिया था.
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