ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होगा. इसी बीच आधिकारिक सूत्रों ने दावा किया है कि वर्तमान सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे. इस अनुपस्थिति को लेकर ईरानी सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई इज़रायल के निशाने पर हैं. भारत में मोजतबा खामेनेई के प्रतिनिधि माने जाने वाले अयातुल्ला हकीम इलाही ने भी बताया है कि मौजूदा हालात में नए सर्वोच्च नेता का सार्वजनिक रूप से अंतिम यात्रा में शामिल होना बड़ा सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है.

कब होगा कार्यक्रम

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चार चरणों में आयोजित किया जाएगा. पहला चरण 4 और 5 जुलाई को तेहरान स्थित इमाम खुमैनी मोसल्ला में आयोजित होगा. इस दौरान खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए जनता के बीच रखा जाएगा. इसके बाद 6 जुलाई को तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. फिर 7 जुलाई को पवित्र शहर क़ोम में श्रद्धांजलि और धार्मिक समारोह आयोजित किए जाएंगे. अंततः 9 जुलाई को खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक (दफन) किया जाएगा.

सुरक्षा एजेंसियों की मुख्य चिंताएं

ईरानी सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अंतिम संस्कार जैसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी खतरनाक साबित हो सकती है. मोजतबा खामेनेई इज़रायली ड्रोन, मिसाइल या अन्य किसी लक्षित हमले का आसान निशाना बन सकते हैं. यही वजह है कि उनकी सार्वजनिक गतिविधियों को सीमित कर दिया गया है और अंतिम संस्कार में उनकी अनुपस्थिति का फैसला लिया गया है.

इज़रायल की धमकी से बढ़ा तनाव

पाकिस्तान, तुर्की और कतर के प्रयासों के बाद ईरान और अमेरिका समझौते की मेज तक पहुंच गए हैं. हालांकि, इज़रायल की ना-नुकूर जारी है. लेबनान के बागियों को लेकर इज़रायल सहमत नहीं हो रहा है. इसी के चलते तनाव तब और बढ़ गया, जब इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई निशाने पर हैं. इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका से अपने सहयोगी इज़रायल को रोकने की अपील की और चेतावनी दी कि ईरानी नेतृत्व के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का "तुरंत और कड़ा जवाब" दिया जाएगा.

पूरे देश में हाई अलर्ट

अंतिम संस्कार को देखते हुए तेहरान, क़ोम और मशहद समेत प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है. अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, हवाई क्षेत्र पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. ईरान ने स्पष्ट किया है कि अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी बाहरी हमले या उकसावे की स्थिति में उसकी सेना तत्काल जवाब देगी.

विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी

यह पूरा मामला और संवेदनशील हो गया है, क्योंकि भारत समेत 30 देशों के सरकारी और धार्मिक प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचने वाले हैं. किसी भी किस्म के हमले से बड़ा तनाव पैदा हो सकता है.

ईरानी और इस्लामी संस्कृति क्या कहती है

इस्लामी परंपरा और ईरानी सामाजिक संस्कृति दोनों में पिता के अंतिम संस्कार में बेटे की मौजूदगी को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस्लाम में माता-पिता के प्रति सम्मान को बड़ा धार्मिक कर्तव्य के तौर पर देखा जाता है. किसी पिता के निधन पर बेटे का जनाज़े की नमाज़ में शामिल होना, अंतिम यात्रा में साथ चलना, दफन के समय मौजूद रहना और बाद में उनके लिए दुआ करना सामाजिक और धार्मिक रूप से आदर्श माना जाता है. हालांकि, इस्लामी शरीयत में ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है. अगर बेटा किसी वास्तविक मजबूरी के चलते शामिल नहीं हो पाए, तो इसे हराम नहीं माना जाता है.

हालांकि, राजनीतिक तौर पर इसके गहरे मायने हो सकते हैं. देश और दुनिया में जो संदेश जाएगा, वह ईरानी सत्ता के पक्ष में नहीं होगा.  ईरान की सत्ता व्यवस्था धर्म और खामेनेई परिवार के साथ रिश्तों पर आधारित है. ऐसे में इस फैसले से जो डर का संदेश जाता है, वह ईरान के लिए ठीक नहीं है. 

"ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होगा. इसी बीच आधिकारिक सूत्रों ने दावा किया है…"