अमेरिका ने एक ऐतिहासिक फैसले में सीरिया को 47 साल बाद अपनी 'आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों की सूची' से बाहर कर दिया है. इस सूची में शामिल होने वाला सीरिया दुनिया के सबसे पुराने देशों में से एक रहा है.
यह सूची 1979 में बनाई गई थी, और सीरिया इसमें उसी दौर से शामिल था. इतने लंबे अरसे बाद इस सूची से बाहर आना सीरिया के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज़ से एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है.
फैसले की वजह क्या बताई गई?
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक इस कदम का मकसद सीरिया में विदेशी निवेश के रास्ते खोलना और देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था के मुख्यधारा में वापस लाना है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह फैसला सीरिया को आर्थिक समृद्धि की दिशा बढ़ाने का एक मौक़ा देगा.
गौरतलब है कि इस बदलाव का प्रस्ताव पहली बार पिछले साल जुलाई में रखा गया था. यानी इस पर अमल में आने में करीब एक साल का वक्त लगा, जो बताता है कि यह फैसला किसी अचानक लिए गए फैसले के बजाय एक सोची-समझी और धीमी कूटनीतिक प्रक्रिया का नतीजा है.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सीरिया में ज़्यादा निवेश आएगा, जिससे वहां राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता मज़बूत होगी. यह बयान इशारा करता है कि अमेरिका सीरिया को सिर्फ कूटनीतिक तौर पर नहीं, बल्कि आर्थिक तौर पर भी पश्चिमी निवेश के दायरे में लाना चाहता है.
सूची में अब बचे सिर्फ तीन देश
सीरिया के हटने के बाद अमेरिका की इस सूची में अब केवल तीन देश रह गए हैं- ईरान, उत्तर कोरिया और क्यूबा.
यह सूची किसी देश पर हथियार बिक्री प्रतिबंध, सहायता रोक और वित्तीय लेन-देन पर कड़ी निगरानी जैसे प्रतिबंध लागू करने का आधार बनती है, इसलिए इससे बाहर निकलना किसी देश के लिए आर्थिक तौर पर बड़ी राहत माना जाता है.
अल-शरा की पृष्ठभूमि: विवाद की जड़
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की भूमिका है. हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने अल-शरा के साथ सीधे संपर्क बढ़ाए हैं.
यह उल्लेखनीय है क्योंकि अल-शरा का अतीत एक उग्रवादी नेता का रहा है. वे पहले अल-क़ायदा से जुड़े एक संगठन का नेतृत्व कर चुके हैं, और अमेरिका ने कभी उनके खिलाफ इनाम तक घोषित किया था.
यह बदलाव पिछले साल की एक और बड़ी कूटनीतिक घटना से जुड़ा है, अमेरिका ने अल-शरा के नेतृत्व वाले इस्लामी संगठन तहरीर अल-शाम को अपनी 'आतंकवादी संगठनों की सूची' से पहले ही हटा दिया था.
यानी अल-शरा और उनके संगठन को लेकर अमेरिका का रुख़ पिछले एक-डेढ़ साल में लगातार नरम हुआ है. पहले संगठन को सूची से हटाना, अब पूरे देश को हटाना, और साथ ही राष्ट्रपति से सीधा संपर्क, यह क्रम अमेरिका की सीरिया नीति में एक स्पष्ट रणनीतिक बदलाव की तरफ इशारा करता है.
आगे के लिए क्या मायने?
विश्लेषकों के लिए यह घटनाक्रम अहम है क्योंकि यह दिखाता है कि अमेरिका किसी देश के नेतृत्व के अतीत को दरकिनार कर भी नई भू-राजनीतिक ज़रूरतों (जैसे सीरिया में ईरान और रूस के प्रभाव को संतुलित करना) के आधार पर रिश्ते फिर से गढ़ सकता है.
हालांकि, अल-शरा के जिहादी अतीत को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई नज़दीकी आगे चलकर सीरिया में स्थिरता लाती है या नए विवादों को जन्म देती है.
-ममता सिंह
"अमेरिका ने एक ऐतिहासिक फैसले में सीरिया को 47 साल बाद अपनी 'आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों की सूची' से बाहर कर दिया है. इस सूची में शामिल…"
