देश में हाल के दिनों में देखे गए जन आंदोलनों की एक नई कड़ी उभरकर सामने आई है, जिसमें इस बार बच्चे और किशोर मुख्य भूमिका में हैं. जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की मुहिम और देशव्यापी Gen-Z विरोध-प्रदर्शनों के बाद अब 2010 के बाद जन्मी पीढ़ी, जिसे Gen-Alpha कहा जाता है, भी सड़कों पर उतरने लगी है.

पिछले क़रीब एक महीने में उत्तर भारत के कई राज्यों से स्कूली बच्चों के प्रदर्शन की ख़बरें आईं. किसी स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी थी, तो कहीं पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी ज़रूरतें ही पूरी नहीं हो रही थीं. कहीं मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे तो कहीं स्कूल तक जाने वाले रास्ते की बदहाली मुद्दा बनी.

उत्तर प्रदेश में कहां-कहां हुए प्रदर्शन
देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश से ऐसे कई मामले सामने आए हैं:

  • लखनऊ (17 अगस्त): भारी बारिश के बावजूद जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की लगभग 250 छात्राएं स्कूल से क़रीब ढाई किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचीं, और वहां मानव-श्रृंखला बनाकर बैठ गईं. उनकी शिकायत थी कि बोर्ड परीक्षा नज़दीक होने के बावजूद फिज़िक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं.
  • फतेहपुर (28 जुलाई): किशनपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में क़रीब एक हज़ार छात्रों ने जर्जर कमरों, टपकती छतों, पंखों और शौचालयों की कमी को लेकर प्रदर्शन किया.  प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद पंखे और आरओ पानी की व्यवस्था कराई गई.
  • हमीरपुर (11 अगस्त): चांदपुर व आसपास के गांवों से क़रीब 200 छात्र और 50 अभिभावक पांच किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, और बरसात में कीचड़ में तब्दील हो जाने वाले स्कूली रास्ते को पक्का करने की मांग की.
  • कन्नौज: अनौगी के नवोदय विद्यालय में क़रीब सौ छात्रों ने हॉस्टल के भीतर ख़ुद को बंद कर भूख-हड़ताल की, खाने और हॉस्टल प्रबंधन को लेकर शिकायत थी.
  • उन्नाव (19 अगस्त): मोहान के जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के 200 से अधिक छात्रों ने सड़क जाम कर दी. ज़िलाधिकारी और एसपी मौक़े पर पहुंचे और छात्रों के साथ बैठकर खाने की गुणवत्ता परखी.
  • कानपुर (22 अगस्त): घाटमपुर के एक प्राथमिक विद्यालय के बच्चे नई इमारत की मांग को लेकर धरने पर बैठे, क्योंकि मौजूदा भवन का एक हिस्सा गिरने के बाद सुरक्षा पर सवाल उठे थे. 

स्कूलों में बिना अनुमति शूटिंग पर पाबंदी
इन घटनाओं के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने 'School Thik karo' अभियान का ऐलान किया और लोगों से सरकारी स्कूलों की हालत के वीडियो साझा करने को कहा. आम आदमी पार्टी ने भी यूपी में इसी नाम से मुहिम चलाई और दावा किया कि उसने 55 सरकारी स्कूलों के वीडियो जुटाए हैं.

जवाब में प्रशासन ने कम से कम सात ज़िलों, हापुड़, अयोध्या, बलरामपुर, आगरा, बलिया, बस्ती और आज़मगढ़, में बेसिक शिक्षा अधिकारियों के ज़रिए बाहरी लोगों, यूट्यूबरों और सोशल मीडिया content creators के स्कूल परिसर में प्रवेश और वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक के आदेश जारी कर दिए.
 सरकार का तर्क है कि इससे पढ़ाई बाधित होती है और बच्चों की privacy प्रभावित होती है. इसी दौर में स्कूलों की बदहाली दिखाने वाले कई कंटेंट क्रिएटरों और कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज होने लगीं.

गिरफ़्तारियों का सिलसिला
हाथरस: सिकंदराराऊ के नावली सिविलियन विद्यालय में परिसर की गंदगी, टूटे शौचालय और अव्यवस्था दिखाता चार मिनट का वीडियो बनाने पर कुलदीप यादव नाम के व्यक्ति की गिरफ़्तारी हुई. वीडियो में स्कूल की प्रधानाचार्य ख़ुद एक कमरे में कई कक्षाएं चलाने की मजबूरी बताती नज़र आती हैं. खंड शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर IT Act की धारा 66(D) और BNS की धारा 229(2) के तहत मामला दर्ज हुआ. कुलदीप की मां का कहना है कि उनके बेटे ने सिर्फ़ सच दिखाया, ग़लती नहीं की.

मेरठ: सरधना क्षेत्र के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में बिखरी और सीलन से ख़राब हुई सरकारी किताबों का वीडियो बनाने पर एडवोकेट संयम पांचाल और अयान मिर्ज़ा को गिरफ़्तार किया गया, हालांकि 24 घंटे में दोनों को ज़मानत मिल गई.

नोएडा: आम आदमी पार्टी की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष पंकज अवाना के ख़िलाफ़ सेक्टर-51 के एक सरकारी स्कूल में बिना अनुमति घुसकर वीडियो बनाने पर FIR दर्ज हुई. अवाना का कहना है कि वे स्कूलों की असलियत दिखाना बंद नहीं करेंगे.

ग्रेटर नोएडा, देवरिया, अमेठी, कन्नौज, रामपुर और मथुरा में भी इसी तरह के मामलों में स्थानीय लोगों, पत्रकारों के सूत्रों और अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ अलग-अलग धाराओं में FIR दर्ज हुई हैं, कहीं गंदगी और मलबे के वीडियो पर तो कहीं बच्चों के नदी पार कर स्कूल जाने के दृश्यों पर. प्रशासन का दावा है कि इनमें से कई वीडियो भ्रामक ढंग से पेश किए गए, जबकि आरोपियों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ ज़मीनी हक़ीक़त दिखाई.

सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 अगस्त की समीक्षा बैठक में सरकारी स्कूलों को लेकर वायरल हो रहे कथित 'भ्रामक वीडियो' पर नाराज़गी जताते हुए दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के निर्देश दिए, साथ ही अधिकारियों को मिड-डे मील, शौचालय और कक्षाओं का निरीक्षण करने को कहा. बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर नकारात्मकता फैलाकर विभाग का मनोबल गिरा रहे हैं, और 2017 से पहले की तुलना में विभाग में बड़ा सुधार होने का दावा किया. सरकार ने क़रीब 40 हज़ार स्कूलों के निरीक्षण के लिए 14-सूत्रीय चेकलिस्ट भी जारी की है.

विपक्ष का सवाल

विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार एक तरफ़ सुविधाएं सुधारने का दावा कर रही है, दूसरी तरफ़ उन्हीं समस्याओं को उजागर करने वालों पर मुक़दमे दर्ज़ करवा रही है. आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा कि FIR के ज़रिए डर पैदा करने की कोशिश हो रही है, लेकिन लोग स्कूलों की सच्चाई सामने लाना बंद नहीं करेंगे.

 

-ममता सिंह 

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