सोनम वांगचुक 20 दिन से जंतर-मंतर पर देह गला रहे हैं. उनका मकसद भूख हड़ताल के माध्यम से केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का है. ताकि वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर कर सकें. हालांकि उनकी इस मांग से देश का विपक्ष अब तक कटा-कटा दिख रहा था. अब ज़रूर इस आंदोलन में कुछ रंगत नज़र आ रही है.
दरअसल, सीजेपी की शुरुआत से ही इसे आम आदमी पार्टी की ‘बी’ टीम के तौर पर देखा जा रहा था. क्योंकि सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका आप की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रह चुके थे. वहीं, 28 जून को शुरू हुई सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 7वें दिन आप नेता संजय सिंह सीजेपी के मंच पर नज़र आए थे. 5 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा जंतर-मंतर पहुंचीं. लेकिन फिर सन्नाटा पसर गया. इस बीच सोनम की तबीयत लगातार बिगड़ती गई, वजन कम होता गया और सोशल मीडिया पर उबाल बढ़ता गया. नतीजतन, देशभर से उन्हें समर्थन मिलने लगा. 13 जुलाई को एक बार फिर आप को सीजेपी की याद आई और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी वहां पहुंची. हालांकि सपा-बसपा और कांग्रेस अब तक इससे दूर थे. लेकिन बढ़ते दबाव के बाद मानसून सत्र के लिए दिल्ली आ रहे नेताओं ने सोनम की सुध लेनी शुरू की.
14 जुलाई को सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उनके लिए एक्स पर पोस्ट लिखा. 15 को सांसद प्रिया सरोज को जंतर-मंतर भेजा और 16 को सपा मुखिया को पत्नी और सांसद डिंपल यादव भी पहुंच गईं. 15 जुलाई को ही आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भी सीजेपी के मंच पर गरजे. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी एक्स पर पोस्ट कर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता ज़ाहिर की. इसके बाद 16 जुलाई को आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी लाव-लश्कर के साथ वांगचुक का हाल जानने पहुंचे. ध्यान दीजिए, देश के प्रमुख राजनीतिक दल यानी कांग्रेस अब तक इससे दूर थी. केजरीवाल के पहुंचने की आहट के बीच काँग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का एक्स पोस्ट आया. जिसमें उन्होंने वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की. वहीं, 17 जुलाई की सुबह राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा उनसे मिलने पहुंचे. इस दौरान भी वे अपनी पार्टी के आंदोलन ‘छात्रों की गूंज’ का राग अलापते दिखाई दिए. यानी देश के प्रमुख विपक्षी दल को 20 दिन लग गए देश की बड़ी शख़्सियत के आंदोलन को समझने में.
देश का प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पहले से ही छात्रों को लेकर सक्रिय है. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मई में सीबीएसई में हुईं गड़बड़ियों का मुद्दा उठाने वाले सार्थक सिद्धांत, वेदांत श्रीवास्तव और निसर्ग अधिकारी से मुलाक़ात की थी. राहुल ने 17 जून को कोटा में छात्रों के साथ बड़ा संवाद कार्यक्रम भी किया था. इस कार्यक्रम का नाम "छात्रों की गूंज" रखा गया था. हालांकि, बाद में वे विदेश चले गए. 13 जुलाई को विेदेश से लौटने के बाद भी छात्रों के साथ उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. ऐसे में कांग्रेस पार्टी किसी भी अन्य आंदोलन का हिस्सा नहीं बनना चाहती थी. वहीं, CJP आंदोलन को मुख्यतः आम आदमी पार्टी से जोड़कर देखा जा रहा है. इसके प्रमुख कार्यकर्ताओ में से कुछ कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में रहे हैं. ऐसे में आंदोलन के प्रति समर्थन दिखाना उनके वोट बैंक को कम करने की संभावना दिखाता है. इसी कारण कांग्रेस छात्रों के इस आंदोलन से दूर दिखाई दी.
वहीं, आंदोलनकारियों सहित देश भर को अभी भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का इंतज़ार है. आपको याद दिला दें कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश के बड़े नेताओं को एक पत्र भेजा था. जिसमें उन्होंने सभी नेताओं को सीजेपी आंदोलन को समर्थन देने की अपील की थी. इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन का नाम भी था. राहुल गांधी का था तो ही. वहीं, सोनम वांगचुक ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर विपक्ष, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है, नीट परीक्षा में अनियमितताओं के ख़िलाफ़ कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का समर्थन नहीं करता, तो जनता उन्हें ख़ारिज कर देगी. वहीं, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती की ख़ामोशी भी लोगों को खल रही है, जबकि यूपी चुनाव चंद महीने ही दूर है. अब देखना यह होगा कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल कब तक चलेगी और क्या नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया देंगे. इस बीच सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का भी आह्वान किया है. देखना होगा कि ये मार्च छात्रों के प्रतिनिधियों को मंसूबों में कामयाबी दिलवा पाएगा या साेशल मीडिया के सितारे फिर जंतर-मंतर पर तारे गिनते नज़र आएंगे.
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