भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के वित्तीय क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए 192 गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) का पंजीकरण प्रमाण पत्र (CoR) रद्द कर दिया है. इन कंपनियों को अब NBFC के रूप में किसी भी तरह का वित्तीय कारोबार करने की अनुमति नहीं होगी. यह कार्रवाई RBI Act, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत की गई है.
आखिर RBI ने इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की?
NBFC भारत की वित्तीय व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं. ये बैंक नहीं होते है, लेकिन वाहन लोन, बिजनेस लोन, गोल्ड लोन, माइक्रोफाइनेंस और कई तरह की वित्तीय सेवाएँ देते हैं.
RBI समय -समय पर इन कंपनियों की जांच करता है, जो कंपनियां नियामकीय मानकों का पालन नहीं करतीं, लंबे समय से निष्क्रिय हैं, न्यूनतम पूंजी की शर्तें पूरी नहीं करतीं या स्वेच्छा से कारोबार बंद कर चुकी हैं, उनके लाइसेंस रद्द किए जाते हैं.
इस बार जारी सूची में 192 कंपनियों के नाम शामिल हैं, जिनका पंजीकरण निरस्त किया गया है.
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किन राज्यों की कंपनियां सबसे ज्यादा?
RBI की सूची पर नजर डालें तो सबसे अधिक कंपनियां पश्चिम बंगाल से हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ की कई कंपनियां भी सूची में शामिल हैं.
क्या ग्राहकों का पैसा डूब जाएगा?
लाइसेंस रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के सभी ग्राहकों का पैसा खत्म हो गया. अगर किसी NBFC पर ग्राहकों या निवेशकों की देनदारी है, तो उसे कानून के मुताबिक उसका निपटारा करना होगा. जरूरत पड़ने पर परिसमापन (Liquidation), दिवालियापन प्रक्रिया या अन्य कानूनी व्यवस्था लागू हो सकती है.
RBI आखिर क्या संदेश देना चाहता है?
पिछले कुछ वर्षों में RBI बैंकिंग और NBFC सेक्टर दोनों में निगरानी काफी सख्त कर चुका है. सहकारी बैंकों पर जुर्माना हो, डिजिटल लेंडिंग के नए नियम हों या NBFC की लगातार समीक्षा. केंद्रीय बैंक का फोकस साफ है कि वित्तीय क्षेत्र में केवल वही संस्थाएं काम करें जो नियमों का पालन करती हैं. 192 NBFC के लाइसेंस रद्द करना उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है.
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