एयरफोर्स के अफसर जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है. उनके नाम के ऐलान के बाद लोगों के मन में एक सवाल जरूर है आखिर मंदिर ट्रस्ट के CEO का काम क्या होगा? क्या उनकी भूमिका किसी कंपनी के CEO जैसी होगी और किन मामलों में उनके पास फैसले लेने का अधिकार होगा?
दरअसल, अयोध्या का राम मंदिर अब सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में शामिल हो चुका है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और आने वाले समय में मंदिर परिसर का और विस्तार भी होना है. ऐसे में व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से चलाने और जिम्मेदारियां तय करने के लिए CEO का पद बनाया गया है.
इसी जिम्मेदारी के लिए एयरफोर्स में अहम पदों पर काम कर चुके जितेंद्र मिश्रा को चुना गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने CEO की भूमिका से जुड़ी कई जिम्मेदारियां तय की हैं. आखिर उनके जिम्मे कौन-कौन से काम होंगे और उनका अधिकार क्षेत्र कितना होगा, आइए समझते हैं.
राम मंदिर CEO की क्या होगी जिम्मेदारी?
जितेंद्र मिश्रा के CEO बनने के बाद राम मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी उनके पास होगी. ट्रस्ट की नीतियों और बड़े फैसलों को जमीन पर लागू करवाना, अलग-अलग विभागों के काम की निगरानी करना और पूरे सिस्टम को बेहतर बनाना उनके प्रमुख कामों में शामिल होगा.
मंदिर के लिए नया सिस्टम बनाना
CEO को मंदिर के कामकाज के लिए नए नियम और SOP तैयार करने होंगे. बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ कैसे संभाली जाएगी, श्रद्धालुओं की एंट्री-एग्जिट कैसे होगी, VIP मूवमेंट और इमरजेंसी की स्थिति में क्या करना है इन सबकी व्यवस्था तय करना उनकी जिम्मेदारी होगी.
कर्मचारियों के काम पर नजर
मंदिर में काम करने वाले अलग-अलग विभागों के बीच काम बांटना और उनकी निगरानी करना भी CEO के जिम्मे होगा. जरूरत के हिसाब से टीम बनाना और जहां कमी हो, वहां सुधार करना भी इसी का हिस्सा है.
दान और मंदिर की संपत्ति का हिसाब
मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती, उसे जमा करने और उसका रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था पर भी CEO की नजर होगी. इसके अलावा ट्रस्ट की जमीन और दूसरी संपत्तियों का सही तरीके से इस्तेमाल और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी.
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा
आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था बेहतर करना CEO के सबसे अहम कामों में से एक होगा. भीड़ को संभालना, लाइन की व्यवस्था, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सुविधाएं और किसी परेशानी की स्थिति में तुरंत व्यवस्था करना उनके काम का हिस्सा होगा.
पुलिस और प्रशासन से तालमेल
मंदिर की सुरक्षा पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां संभालेंगी, लेकिन CEO को उनके साथ लगातार तालमेल रखना होगा. भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और किसी इमरजेंसी की तैयारी में प्रशासन के साथ बेहतर कोऑर्डिनेशन करना भी जरूरी होगा.
बड़े त्योहारों की तैयारी
राम नवमी, दीपावली और दूसरे बड़े धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है. ऐसे मौकों पर पार्किंग, मेडिकल सुविधा, प्रवेश-निकास, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की पहले से तैयारी करना CEO की जिम्मेदारी होगी.
पूजा-पाठ नहीं, व्यवस्था संभालेंगे
CEO खुद मंदिर की पूजा-पाठ या धार्मिक फैसले नहीं करेंगे. उनका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि पूजा और धार्मिक कार्यक्रम बिना किसी प्रशासनिक परेशानी के सही तरीके से हो सकें.
VIP और संतों की व्यवस्था
बड़े संतों और खास मेहमानों के मंदिर आने पर उनके प्रवेश, सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्था करना भी CEO की जिम्मेदारियों में शामिल होगा.
सरकार के साथ तालमेल
राम मंदिर ट्रस्ट सरकार का कोई विभाग नहीं है और CEO ट्रस्ट के अधीन काम करेंगे. हालांकि सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य और बड़े आयोजनों जैसे मामलों में पुलिस और प्रशासन के साथ तालमेल रखना जरूरी होगा.
भविष्य की तैयारी और जवाबदेही
CEO का काम सिर्फ आज की व्यवस्था संभालना नहीं होगा. आने वाले समय में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और मंदिर परिसर के विस्तार को देखते हुए नए सिस्टम तैयार करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी. साथ ही ट्रस्ट के कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही लाने पर भी जोर रहेगा.
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