रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और आपसी स्नेह का त्योहार है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं. साथ ही उनके सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं. इसके बदले भाई बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का संकल्प लेते हैं और उन्हें उपहार देते हैं. 

गौरतलब है कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी की भावना भी जुड़ी है. धार्मिक मान्यताओं में इस पर्व से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं. 

श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी मान्यता

रक्षाबंधन की परंपरा को भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से भी जोड़ा जाता है. मान्यता के अनुसार, शिशुपाल वध के दौरान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी. उससे रक्त बहने लगा. 

यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ा और श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया. द्रौपदी के इस स्नेह से श्रीकृष्ण भावुक हो गए. उन्होंने उनकी रक्षा करने का वचन दिया. 

बाद में जब द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर अपना वचन निभाया. इसी घटना को भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के भाव से जोड़कर देखा जाता है. 

राजा बलि और मां लक्ष्मी की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध कथा राजा बलि और भगवान विष्णु की है. राजा बलि भगवान विष्णु के परम भक्त और बहुत बड़े दानी माने जाते थे. 

धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी. बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली. वामन भगवान ने दो पग में धरती और आकाश नाप लिया. तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया. 

इसके बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु से पाताल लोक में रहने का आग्रह किया. भगवान उनकी बात मानकर वहां रहने लगे. उधर, भगवान विष्णु के वापस न आने से मां लक्ष्मी चिंतित हो गईं. 

मान्यता है कि मां लक्ष्मी ने एक गरीब महिला का रूप धारण किया और राजा बलि के पास पहुंचकर उन्हें राखी बांधी. बलि ने राखी का मान रखते हुए उनसे मनचाहा उपहार मांगने को कहा. तब मां लक्ष्मी ने अपना वास्तविक रूप प्रकट किया और भगवान विष्णु को वापस भेजने का आग्रह किया. 

राजा बलि ने राखी का सम्मान रखते हुए भगवान विष्णु को मां लक्ष्मी के साथ वापस भेज दिया. दरअसल, यह कथा भी रक्षा सूत्र के महत्व और उसके सम्मान की भावना को दर्शाती है. 

रक्षाबंधन पर पहले तिलक या राखी?

अब सवाल आता है कि रक्षाबंधन की पूजा में पहले तिलक किया जाए या राखी बांधी जाए. सामान्य धार्मिक परंपरा के अनुसार, पहले भाई को तिलक लगाया जाता है. इसके बाद अक्षत लगाए जाते हैं और फिर दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है. 

राखी बांधते समय बहन भाई के सुख, अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती है. इसके बाद भाई की आरती की जाती है और उसे मिठाई खिलाई जाती है. 

हालांकि, परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार रस्मों के क्रम में थोड़ा अंतर हो सकता है. इसलिए अपने घर की परंपरा का पालन करना भी उचित माना जाता है. 

रक्षाबंधन की थाली में क्या रखें?

राखी की थाली को बहुत ज्यादा सामान से भरने की जरूरत नहीं होती. इसमें सामान्य तौर पर ये चीजें रखी जा सकती हैं:

  • राखी
  • रोली या कुमकुम
  • अक्षत
  • दीपक
  • मिठाई
  • आरती की सामग्री
  • फूल

चाहें तो थाली को फूलों या छोटी रंगोली से भी सजा सकते हैं. खास बात यह है कि पूजा की सामग्री साफ-सुथरी हो और पूरे मन से रस्म पूरी की जाए. 

राखी बांधने की सरल विधि

सबसे पहले भाई को साफ आसन पर बैठाएं. इसके बाद पूजा की थाली अपने पास रखें. 

फिर भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं. तिलक के ऊपर अक्षत लगाएं. इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें. 

राखी बांधते समय भाई की खुशहाली और अच्छे भविष्य की कामना करें. इसके बाद आरती उतारें और मिठाई खिलाएं. भाई भी बहन को उपहार देकर अपना प्यार जताता है. 

इन बातों का रखें ध्यान

राखी बांधते समय जल्दबाजी न करें. रक्षा सूत्र न तो बहुत ढीला हो और न ही इतना कसा हो कि कलाई पर परेशानी हो. दीपक जलाते समय भी सावधानी बरतें. 

दरअसल, रक्षाबंधन की असली खूबसूरती महंगे उपहारों में नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच मौजूद प्रेम और विश्वास में है. यही भावना इस त्योहार को खास बनाती है. 


 

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