पंजाब में 27 अगस्त को सरकारी कर्मचारियों द्वारा आहूत राज्यव्यापी 'महा हड़ताल' का व्यापक असर देखने को मिला. सरकारी दफ्तरों में कामकाज बाधित रहा और सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर ओपीडी सेवाएं बंद रहीं. 'पंजाब सांझा मुलाजम मंच' के बैनर तले 150 से अधिक कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया. 

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की किस्तें जारी करना शामिल है. संगठनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए यह आंदोलन किया गया. 

अस्पतालों में असर
अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में चिकित्सकों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में शामिल एक चिकित्सक ने बताया कि ओपीडी सेवाएं बंद रहीं, जबकि आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं. होशियारपुर के एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में भी सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रखने का निर्णय लिया गया. पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने भी हड़ताल के आह्वान का समर्थन किया. 

सिविल सचिवालय से लेकर तहसील दफ्तर तक असर
कर्मचारी संगठनों के अनुसार सिविल सचिवालय, निदेशालयों, उपायुक्त कार्यालयों, उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) कार्यालयों और तहसील कार्यालयों में हड़ताल का असर रहा. स्वास्थ्य, परिवहन, राजस्व और शिक्षा समेत अन्य विभागों के कर्मचारी भी इसमें शामिल हुए, जिससे कुछ जिलों में उपस्थिति काफी कम रही. हालांकि सरकारी बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं और कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान सड़कों पर जाम नहीं लगाया जाएगा.

सीएम मान: ‘बातचीत और हड़ताल साथ नहीं चल सकती’
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हड़ताली कर्मचारियों से स्पष्ट कहा कि बातचीत तभी होगी, जब वे हड़ताल खत्म करेंगे. मान को बृहस्पतिवार को जालंधर में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करनी थी. सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, "कर्मचारी हमारे परिवार का अहम हिस्सा हैं और उनकी हर जायज मांग सुनने के लिए हम तैयार हैं. लेकिन बातचीत तभी होगी, जब हड़ताल खत्म की जाएगी."

पंजाब में करीब तीन लाख सरकारी कर्मचारी और 3.50 लाख पेंशनभोगी हैं. संगठनों का कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रखने पर विचार किया जाएगा.

 

-ममता सिंह 

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