कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey Of Love In India’ को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने इस किताब को भारत में प्रकाशित करने से इनकार कर दिया है.
जानकारी के अनुसार, प्रकाशक ने पांडुलिपि के एक हिस्से में कुछ ‘संपादकीय बदलाव और कटौती’ करने की मांग रखी थी, लेकिन सोनिया गांधी ने इन सुझावों को मानने से मना कर दिया. इसी असहमति के चलते पीआरएचआई ने भारत में इस किताब को न छापने का फैसला लिया.
इस घटनाक्रम ने प्रकाशन जगत में हलचल मचा दी है और अब कई भारतीय प्रकाशक इस किताब के अधिकार पाने की दौड़ में शामिल हो गए हैं.

सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर क्यों मचा विवाद
रिपोर्टों के मुताबिक, यह पूरा विवाद पांडुलिपि के एक खास हिस्से को लेकर हुआ. पीआरएचआई इसमें कुछ बदलाव और कुछ हिस्सों को हटाना चाहता था, लेकिन सोनिया गांधी इसके लिए राज़ी नहीं हुईं. इसी वजह से भारत में इस किताब को प्रकाशित करने की योजना टूट गई.
इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले को लेकर अमेरिका स्थित प्रकाशक नॉफ और सोनिया गांधी की एजेंट डेविड गॉडविन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. पीआरएचआई के सीईओ गौरव श्रीनागेश से भी इन प्रस्तावित बदलावों को लेकर सवाल पूछे गए, मगर वह भी इस पर टिप्पणी करने के लिए उपलब्ध नहीं हुए.

पीआरएचआई के हटने के बाद अब कई भारतीय प्रकाशक इस किताब को छापने के अधिकार हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं. खबरों के अनुसार, हार्पर कॉलिन्स इस समझौते को अंतिम रूप देने के करीब बताया जा रहा है और जल्द ही भारत में इस किताब को प्रकाशित व वितरित करने की जिम्मेदारी उसे मिल सकती है.

यह किताब 10 नवंबर को रिलीज़ होने वाली है. इसकी घोषणा सबसे पहले अमेरिका स्थित प्रकाशन कंपनी अल्फ्रेड ए नॉफ ने की थी, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक हिस्सा है. कंपनी के मुताबिक इस किताब की पहली प्रति एक लाख कॉपी की होगी. 
सोनिया गांधी इससे पहले भी कई किताबें लिख और संपादित कर चुकी हैं, लेकिन जिन लोगों ने इस आत्मकथा पर काम किया है, उनका कहना है कि यह उनके जीवन का अब तक का सबसे निजी और स्पष्ट विवरण है.

नॉफ ने इस किताब को दुनिया की सबसे प्रमुख महिला नेताओं में से एक की एक दिलचस्प आत्मकथा बताया है, जो प्रेम, परिवार और भारत जैसे आकर्षक देश की कहानी बयां करती है. प्रकाशक द्वारा जारी किए गए बयान में सोनिया गांधी ने कहा कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम लेखन उनके परिवार की असली मंशा, कार्यों और यहां तक कि इंसानी कमजोरियों तक पहुंच पाया. उन्होंने आगे कहा कि उनकी यह किताब पिछले छह दशकों में उन्होंने जो सामाजिक और राजनीतिक बदलाव देखे हैं, उसका एक अनोखा नजरिया भी पेश करती है.

पीआरएचआई से जुड़े पुराने मामले भी आए सामने
यह पहली बार नहीं है जब पीआरएचआई किसी किताब को लेकर विवादों में घिरा हो. इसी साल की शुरुआत में पीआरएचआई ने एक बयान जारी कर कहा था कि उसने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की आत्मकथा "Four Stars Of Destiny" को नहीं छापा है, हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इस किताब की एक हार्ड कॉपी दिखाई थी. इस आत्मकथा के कुछ अंश, जिनमें गलवान में भारत-चीन झड़प और अग्निपथ योजना से जुड़े नरवणे के अनुभव शामिल थे, मीडिया में भी छपे थे.

इसके अलावा, जून महीने में इंडियन एक्सप्रेस ने सबसे पहले यह रिपोर्ट दी थी कि पीआरएचआई ने मशहूर ग्राफिक नॉवेलिस्ट जो सैको की मुज़फ्फरनगर दंगों पर आधारित किताब 'द वंस एंड फ्यूचर रायट' को भी बीच में ही रोक दिया था. उस समय श्रीनागेश ने कहा था कि कानूनी जांच प्रक्रिया के दौरान सैको की किताब में कुछ "कंटेंट से जुड़ी समस्याएं" सामने आई थीं, जिसमें भारत की गलत सीमाएं दिखाने वाला एक नक्शा भी शामिल था.

 

-ममता सिंह 

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