न्यूजीलैंड सरकार बच्चों को इंटरनेट के खतरों से बचाने के लिए एक बहुत सख्त कदम उठाने जा रही है. सरकार संसद में एक नया विधेयक पेश करेगी, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया है. अगर कोई सोशल मीडिया कंपनी इन नियमों को नहीं मानती है, तो उस पर उसकी कुल कमाई का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है.

16 साल से कम उम्र वालों पर लगेगा बैन

प्रस्तावित कानून के तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. अगर कोई कंपनी इस नियम का पालन नहीं करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. यह जुर्माना कंपनी की कुल कमाई का 10 प्रतिशत तक हो सकता है.

सरकार का मानना है कि बच्चों को सोशल मीडिया के खतरों से बचाने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं.

कंपनियों को करनी होगी उम्र की जांच

नए नियम के बाद सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर की उम्र जांचनी होगी. केवल यूजर की बताई हुई उम्र को सही नहीं माना जाएगा.

कंपनियां इसके लिए कई तरीकों का इस्तेमाल कर सकती हैं. इनमें डिजिटल पहचान दस्तावेज और चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक शामिल है. अकाउंट से जुड़ी जानकारी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

बच्चों की नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि 13 से 17 साल की उम्र का हर तीसरा बच्चा रोजाना कम से कम पांच घंटे सोशल मीडिया पर बिता रहा है.

सरकार के मुताबिक इसका असर बच्चों की नींद और पढ़ाई पर पड़ रहा है. इसका असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी दिख रहा है.

इसके अलावा हानिकारक कंटेंट और लत लगाने वाले एल्गोरिदम भी बच्चों के लिए चिंता का कारण हैं. लगातार सोशल मीडिया पर बने रहने का दबाव भी बच्चों पर असर डाल सकता है.

इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म होंगे दायरे में

सरकार ने हाई रिस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इस कानून के दायरे में रखने की बात कही है. इनमें इंस्टाग्राम, टिकटॉक, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं.

इन प्लेटफॉर्म पर लगातार स्क्रॉल करने और यूजर को बार-बार जोड़े रखने वाले फीचर्स होते हैं. सरकार इन्हीं चीजों को बच्चों के लिए जोखिम मान रही है.

पढ़ाई और गेमिंग ऐप्स को मिलेगी राहत

हर तरह के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह बैन लागू नहीं होगा. शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्लेटफॉर्म को इससे बाहर रखा जाएगा.

मैसेजिंग और वॉयस कॉलिंग सेवाओं को भी राहत मिलेगी. ऑनलाइन गेम्स और म्यूजिक प्लेटफॉर्म भी इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगे.

प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म और AI चैटबॉट्स को भी प्रस्तावित कानून में शामिल नहीं किया गया है.

माता-पिता पर नहीं होगी कार्रवाई

सरकार ने साफ किया है कि नियम बच्चों या उनके माता-पिता को सजा देने के लिए नहीं है. इसकी जिम्मेदारी सोशल मीडिया कंपनियों की होगी.

नियमों की निगरानी के लिए एक नई ऑनलाइन सुरक्षा एजेंसी बनाई जाएगी. यह एजेंसी कंपनियों पर जुर्माना लगा सकेगी. गलत जानकारी देने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकेगी.

सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित ऑनलाइन माहौल देना है.

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