मद्रास हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के साथ रहने को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि हर स्थिति में पत्नी का पति के साथ जाना जरूरी नहीं है. कोर्ट ने इसकी तुलना Vodafone के पुराने विज्ञापन में दिखने वाले पग से की. जजों ने कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह हर जगह पति के पीछे-पीछे जाती रहे.

दरअसल, यह पूरा मामला एक दंपति के तलाक से जुड़ा है. पति ने पत्नी पर किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध होने का आरोप लगाते हुए तलाक मांगा था. लेकिन फैमिली कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी थी. इसके बाद मामला मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा.

क्या था पूरा मामला?

इस कपल की शादी सितंबर 1992 में हुई थी. दोनों के चार बच्चे हैं. शादी के कुछ साल बाद पति को नौकरी के सिलसिले में शिवगंगा से मुंबई जाना पड़ा.

पति मुंबई चला गया, लेकिन पत्नी उसके साथ नहीं गई. यही बात बाद में इस केस में अहम बन गई.

पति ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक अलग रहने के दौरान पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध बन गए. इसी आधार पर उसने तलाक की मांग की.

हालांकि, फैमिली कोर्ट ने पति के तर्क को नहीं माना. कोर्ट ने उल्टा यह माना कि पत्नी से अलग रहना पति की अपनी गलती थी. उसके मुताबिक, पति को नौकरी के लिए दूसरी जगह जाते समय पत्नी को भी अपने साथ ले जाना चाहिए था.

यहीं से मामला थोड़ा दिलचस्प हो गया. क्योंकि हाई कोर्ट के सामने सवाल सिर्फ तलाक का नहीं था, बल्कि यह भी था कि क्या पति-पत्नी के लिए हर हाल में एक ही जगह रहना जरूरी है?

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

इस सवाल पर मद्रास हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट की सोच से असहमति जताई. जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और एमडी सुमति की बेंच ने कहा कि पति-पत्नी का हर समय एक साथ रहना संभव नहीं होता. नौकरी, पोस्टिंग और दूसरी जिम्मेदारियों के चलते दोनों को अलग-अलग जगह रहना पड़ सकता है. कोर्ट ने सैनिकों का उदाहरण दिया. जजों ने कहा कि अगर पति सेना में है, तो हर पोस्टिंग पर पत्नी को साथ ले जाना संभव नहीं हो सकता. वहीं पत्नी खुद भी किसी दूसरे शहर में अच्छी नौकरी कर रही हो सकती है. ऐसे में उससे नौकरी छोड़कर पति के साथ जाने की उम्मीद नहीं की जा सकती. इसी बात को समझाने के लिए कोर्ट ने Vodafone के विज्ञापन में दिखने वाले पग का उदाहरण दिया. कोर्ट ने कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह उस पग की तरह पति के पीछे-पीछे चलती रहे.

फिर तलाक क्यों हुआ?

गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने पति के लगाए व्यभिचार के आरोप को स्वीकार नहीं किया. यानी पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध होने की बात साबित नहीं मानी गई.

फिर भी मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. कोर्ट ने देखा कि दोनों के रिश्ते काफी लंबे समय से खराब थे. सुनवाई के समय पति 67 साल का था और दोनों करीब 16 साल से अलग रह रहे थे.

कोर्ट ने दोनों को फिर से साथ लाने की कोशिश भी की. जजों ने आपसी समझौते की संभावना तलाशने के लिए दोनों पक्षों से बातचीत की. लेकिन यह कोशिश सफल नहीं हुई.

कोर्ट ने माना कि दोनों के बीच इतनी कड़वाहट आ चुकी है कि अब उनके दोबारा साथ रहने की कोई वास्तविक संभावना नहीं है.

इसी आधार पर हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला पलट दिया और शादी खत्म करने का आदेश दिया.

पत्नी को 7 लाख रुपये देने का आदेश

तलाक मंजूर करने के साथ हाई कोर्ट ने पति को पत्नी को 7 लाख रुपये देने का भी निर्देश दिया. यह रकम एलिमनी यानी गुजारा-भत्ते के तौर पर दी जानी है.

गौरतलब है कि इस मामले में हाई कोर्ट ने पति के आरोप को तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन दोनों के रिश्ते की मौजूदा स्थिति को देखते हुए शादी खत्म करने का फैसला लिया.


 

"मद्रास हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के साथ रहने को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि हर स्थिति में पत्नी का पति के साथ जाना जरूरी नहीं है…"