27 देशों वाले यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच हाल ही में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ है. अमेरिका से तनाव के बाद भी भारतीय बाजार यूरोपीय मुल्कों के लिए सहारा बना था. तमाम दोस्ताना संबंधों के बावजूद यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान के साथ बयान जारी कर जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किया है. हालांकि, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अब विदेश मंत्रालय ने कड़ा ऐतराज जताया है. आइए जानते हैं पूरा मामला और भारत का जवाब.

पाकिस्तान और यूरोप क्या बोला

पूरे विवाद की जड़ें 1 जून को इस्लामाबाद में हुए यूरोपीय संघ (EU) और पाकिस्तान के बीच हुई बैठक में समाहित हैं. दरअसल, इस रोज दोनों पक्षों के बीच आठवीं रणनीतिक वार्ता हुई. इस वार्ता के बाद जो संयुक्त बयान जारी किया गया, उसमें दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा की गई थी. इसी क्रम में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर अपना पक्ष EU के समक्ष रखा.

कश्मीर का जिक्र

वार्ता में दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की बात कही. वार्ता विवादों में तब आ गई, जब पाकिस्तान ने कश्मीर को एक अंतरराष्ट्रीय विवाद बताते हुए कहा कि, इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों और कश्मीरी जनता के हिसाब से होना चाहिए.

संयुक्त बयान में भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव, नियंत्रण रेखा (LoC) पर संघर्षविराम बनाए रखने, संवाद को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय शांति के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता का भी उल्लेख किया गया.

भारत की प्रतिक्रिया

2 जून को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने EU-पाकिस्तान संयुक्त बयान को "अनावश्यक" (unwarranted) बताते हुए कहा कि, भारत इस तरह के उल्लेख को खारिज करता है, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है तथा इस पर किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.

भारत का कश्मीर पर रुख

कश्मीर को लेकर भारत की पॉलिसी लंबे समय से स्पष्ट और तय रही है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख मुल्क के अभिन्न एवं अविभाज्य अंग हैं. नई दिल्ली लगातार कहती रही है कि कश्मीर से जुड़े सभी मुद्दे भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय विषय हैं. इस मामले में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है.

हालांकि ट्रम्प कश्मीर पर बयान देते रहते हैं. और इस बयानबाजी को लेकर भारत ने प्रतिक्रिया न देने की रणनीति अपनाई है.

EU-भारत के रिश्ते

यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है. ट्रम्प की सनक के चलते दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का व्यापार लगभग 137 अरब डॉलर का रहा, जबकि सेवाओं के व्यापार को जोड़ने पर कुल द्विपक्षीय व्यापार 200 अरब डॉलर से अधिक पर पहुंच जाता है.
 

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