चार धामों में शामिल ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी आस्था, रहस्यों और अनोखी परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. हर साल यहां भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन होता है.इस वर्ष रथ यात्रा 16 जुलाई से 24 जुलाई तक चलेगी.मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 22 पवित्र सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.इन सीढ़ियों में तीसरी सीढ़ी को लेकर एक खास मान्यता प्रचलित है.कहा जाता है कि अधिकांश भक्त इस सीढ़ी पर पैर रखने से बचते हैं.आखिर इसके पीछे क्या धार्मिक रहस्य और मान्यता छिपी है,आइए जानते हैं.

कैसे पड़ा जगन्नाथ नाम?
इस इलाके के लोग पहले भगवान कृष्ण को नीलमाधव के रूप में पूजते थे. हालांकि, राजा इंद्रद्युम्न के इस मंदिर का निर्माण कराने के बाद भगवान लकड़ी के विग्रह में यहां स्थापित किए गए. इसके बाद उन्हें जगन्नाथ के रूप में पूजा जाने लगा क्योंकि शास्त्रों के अनुसार, अपनी लीलाएं समाप्त कर वे समस्त विश्व के पालनहार बन गए.

आखिर क्यों चढ़नी पड़ती हैं 22 सीढ़ियां?
पुराणों के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान की मूर्तियां बनाने के लिए देवशिल्पी विश्वकर्मा को आमंत्रित किया. उन्होंने शर्त रखी कि 21 दिनों तक कोई भी कक्ष का द्वार नहीं खोलेगा.लेकिन15वें दिन राजा ने चिंता में दरवाजा खोल दिया.अंदर विश्वकर्मा अदृश्य हो चुके थे और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां अधूरी अवस्था में थीं. तभी भगवान ने स्वप्न में राजा को दर्शन देकर कहा कि वे इसी स्वरूप में पृथ्वी पर विराजमान रहना चाहते हैं. तभी से भगवान जगन्नाथ की अधूरी मूर्तियों की पूजा की जाती है. वहीं, मंदिर में प्रवेश करने के लिए 22 सीढ़ियों को चढ़ना पड़ता है. इन सीढ़ियों में नव रूपी जीवन का कमजोरियों या बुराइयों का प्रतीक. इनसे विजय प्राप्त करने के बाद ही मोक्ष की प्राप्ति की जाती है.

क्यों लांघी जाती है जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से लोग पापों से मुक्त होने लगे थे. इससे चिंतित होकर यमराज ने भगवान से कहा कि यदि ऐसा ही चलता रहा, तो यमलोक में कोई नहीं आएगा. तब भगवान जगन्नाथ ने यमराज को मंदिर के मुख्य द्वार की तीसरी सीढ़ी पर स्थान दिया, जिसे 'यम शिला' कहा जाता है. मान्यता है कि दर्शन के बाद यदि कोई इस शिला पर पैर रखता है, तो उसके पुण्य नष्ट हो जाते हैं. यही कारण है कि आज भी श्रद्धालु तीसरी सीढ़ी पर कदम रखने से बचते हैं.
 

"चार धामों में शामिल ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी आस्था, रहस्यों और अनोखी परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. हर साल यह…"