वर्ष 2020 में  कोविड महामारी के दौरान भारतीय पूंजी बाजार सबसे कम मूल्यांकन पर था, वर्ष 2020 में सबसे कम 31 आईपीओ पूंजी बाजार में सूचीबद्ध हुए. विदेशी कंपनियों ने भारत के उभरते आईपीओं बाजार को एक अवसर के रूप में देखा. वर्ष 2021 में 91, 2022 में 90 , वर्ष 2023 में 120, वर्ष 2024 में 158 आईपीओ, 2025 में 93 आईपीओ बढ़कर 255 एवं इस वर्ष मई 2026 तक 56 आईपीओ पूंजी बाजार (शेयर मार्केट) में सूचीबद्ध हुए. इस दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय कंपनियों के आईपीओ में भरपूर पैसा लगाया. 

क्या होता है आईपीओ

इनीशियल् पब्लिक ऑफ़रिंग (आईपीओ) अर्थात् प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कंपनी पहली बार अपने शेयर आम जनता को बेचने का प्रस्ताव रखती है. यह कंपनियों के लिए बाजार से पैसा उठाने का तरीका है. इसके माध्यम से कंपनियाँ अपने शुरुवाती निवेशकों को मौका देती है कि वे अपनी हिस्सेदारी को बिक्री कर एक लाभ अर्जित करें.

भारतीय रुपया कैसे हो रहा कम

आईपीओ के विस्तार के वर्ष में विदेशी निवेशकों ने जो पैसा लगाया था, अभी बाजार के बढ़ते मूल्यांकन के वजह से वह निवेश कई गुना तक बढ़ गया है. प्राइम डेटाबेस एक बाजार अनुसंधान फर्म है. उसकी रिपोर्ट के अनुसार 6 विदेशी कंपनियो के भारतीय इकाई जो शेयर मार्केट में सूचीबद्ध हुये थे, उनमें से 5 कंपनियों ने अपनी हिस्सेदारी को ऑफर फार सेल (OFS) के रूप में अपनी हिस्सेदारी आम निवेशक को बेचकर, निवेश को अपने देश वापस ले जा चुके है. केवल एक विदेशी कंपनी ने ही भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी को बनाये रखा है.

रुपया और विदेशी निकास 

2024 से लेकर अभी तक रुपया डॉलर के मुकाबले 13 प्रतिशत कमजोर हुआ है एवं इस वर्ष यह 6 प्रतिशत से अधिक कमजोर हुआ है. इसकी कमजोरी का एक कारण निवेश का निकास भी है. इस साल अब तक, विदेशी पोर्टफ़ोलियो निवेशकों ने अपनी होल्डिंग्स में से 23 बिलियन डॉलर से अधिक की बिक्री की है, जो 2025 के 18.9 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड विदेशी निकास से 4.1 बिलियन डॉलर अधिक है. 

कौन-कौन सी कंपनियों ने बेची है हिस्सेदारी

विदेशी  कंपनियों ने भारतीय बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन (मूल्यांकन) का फायदा उठाकर अरबों डॉलर कमाए हैं। हुंडई मोटर्स ने लगभग 24,000 करोड़ रुपये  के, हुंडई इंडिया मोटर्स के शेयर्स बेचे है. एलजी इलेक्ट्रॉनिक ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के लगभग 10,100 करोड़ के शेयर बेचे है. टिनैको क्लीन एयर इंडिया, ओरेकल इंडिया इत्यादि कंपनियों ने कुल मिलाकर 40,000 करोड़ से अधिक के निवेश को भारत से बाहर भेजा है.

कौन कौन सी कंपनियाँ है इसी राह पर

वालमार्ट की भारतीय इकाई फोनपे, कोका-कोला और कार्ल्सबर्ग जैसी कंपनियां भी आने वाले समय में इसी OFS मार्ग के जरिए भारतीय रुपये में अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा लेकर विदेश जा सकते है.

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