देश में बेरोज़गारी पर बहस कभी खत्म नहीं होती. एक तरफ नौकरी की तलाश में लाखों युवा हर साल भटकतें हैं, दूसरी ओर सरकार की ताज़ा आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) रिपोर्ट कहती है कि जून 2026 में देश की बेरोजगारी दर 5.5% रही, जो पिछले महीने के बराबर है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब आबादी 145 करोड़ के करीब है और रोजगार की चुनौती लगातार चर्चा में रहती है, तो आखिर बेरोज़गारी सिर्फ 5.5% कैसे हो सकती है? इसका जवाब सरकारी आंकड़ों को समझने में छिपा है.
सरकारी आंकड़ों में कौन होता है बेरोजगार?
आमतौर पर लोग मानते हैं कि जिसके पास नौकरी नहीं है, वह बेरोजगार है. लेकिन सरकारी परिभाषा इससे अलग है. PLFS के मुताबिक बेरोजगार वह व्यक्ति है जिसके पास कोई काम नहीं है, लेकिन वह काम करने के लिए उपलब्ध है और सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश कर रहा है. यानी छात्र, गृहिणियां, रिटायर हो चुके लोग या वे लोग जो नौकरी करना ही नहीं चाहते, उन्हें बेरोजगार नहीं माना जाता. यही वजह है कि सरकारी बेरोज़गारी का आंकड़ा आम धारणा से अलग दिखाई देता है.
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बेरोज़गारी दर कैसे निकाली जाती है?
अगर 100 लोगों में से 60 लोग नौकरी कर रहे हैं, 5 लोग नौकरी ढूंढ़ रहे हैं और 35 लोग छात्र, गृहिणी या बुजुर्ग हैं, तो श्रम बल केवल 65 लोगों की होगी. ऐसे में बेरोज़गारी दर 5 ÷ 65 × 100 यानी 7.7% होगी. यही फॉर्मूला पूरे देश पर लागू होता है.
जून 2026 की PLFS रिपोर्ट क्या कहती है?
रिपोर्ट के मुताबिक 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 54.4% रही. यानी लगभग आधी आबादी ही रोजगार बाजार का हिस्सा है. वहीं श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) 51.4% रहा, जिसका मतलब है कि कामकाजी उम्र की आबादी में से करीब आधे लोग वास्तव में काम कर रहे हैं. इसी आधार पर देश की बेरोजगारी दर 5.5% दर्ज की गई.
शहरों में रोजगार की चुनौती ज्यादा
रिपोर्ट बताती है कि जून में शहरी क्षेत्रों में अधिक लोग नौकरी की तलाश में आए. इसका असर यह रहा कि शहरी श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 50.1% हो गई. हालांकि इसी दौरान शहरी बेरोज़गारी दर भी 6.4% से बढ़कर 6.6% पहुंच गई. दूसरी तरफ ग्रामीण भारत में बेरोज़गारी दर 5.1% से घटकर 5.0% हो गई, जो अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति का संकेत देती है.
महिलाओं की भागीदारी में हल्का सुधार
रोजगार बाजार में महिलाओं की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है. जून 2026 में महिलाओं का श्रम बल भागीदारी दर 32.7% रहा, जबकि जून 2025 में यह 32.0% था. यानी एक साल में महिलाओं की श्रम भागीदारी में हल्का सुधार देखने को मिला है.
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