नई दिल्ली, 1 सितंबर:  वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की है, जो रिज़र्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी बेहतर है. 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश की ‘सामूहिक शक्ति’ का परिणाम बताते हुए विपक्ष पर निराशा फैलाने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस ने इन आंकड़ों को ‘भ्रामक तस्वीर’ करार देकर रोज़गार और निवेश जैसे सवाल खड़े किए हैं.

पीएम मोदी: ‘यह हमारी सामूहिक ताक़त का प्रतिबिंब’
सोमवार को एक्स पर जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर से पूरा देश खुश है और यह देशवासियों की मेहनत व संकल्प का नतीजा है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में युद्ध, संकट और सप्लाई चेन में बाधाओं के बावजूद भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जबकि कुछ लोग देश के भीतर ही निराशा और झूठ फैलाने में लगे हैं.
 उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी अपनाने पर ज़ोर देते हुए लोगों से विदेश में शादियां न करने, विदेशी सैर-सपाटे से बचने और ज़रूरत न होने पर सोना न खरीदने की अपील की, ताकि आज़ादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाया जा सके.

एक अन्य बयान में पीएम मोदी ने आलोचकों पर तंज कसते हुए कहा कि ‘डूम्सेयर्स डूम्ड और इंडिया ब्लूम्ड... एक बार फिर!’ उन्होंने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को एक ‘हरक्यूलियन उपलब्धि’ बताया.

आंकड़े क्या कहते हैं
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 81.36 लाख करोड़ रुपये आंकी गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 75.46 लाख करोड़ रुपये थी. 
मौजूदा कीमतों पर मापी गई नॉमिनल जीडीपी 88.27 लाख करोड़ रुपये रही, यानी 10.3 प्रतिशत की वृद्धि. Gross Value Added (GVA) 8.2 प्रतिशत बढ़कर 73.82 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. 
आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान को 6.6 से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है. तिमाही आंकड़ों में आगे संशोधन संभव है, और अगली तिमाही (जुलाई-सितंबर) के आंकड़े 30 नवंबर 2026 को जारी होंगे.
 मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र ने पश्चिम एशिया संकट के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया, और इसका श्रेय सरकार के उन प्रयासों को दिया जिनसे इनपुट-साइड बाधाओं को रोका जा सका.

वित्त मंत्री सीतारमण की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी आंकड़ों का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस मज़बूत प्रदर्शन का श्रेय देश की जनता की मेहनत को जाता है, और एनडीए सरकार के सुधारों तथा कुशल आर्थिक प्रबंधन से नतीजे मिल रहे हैं. 

कांग्रेस का पलटवार 
दूसरी ओर कांग्रेस ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इसे ‘जीडीपी - ग्रेटली डिस्टॉर्टेड पिक्चर’ बताते हुए कहा कि ये आंकड़े अर्थव्यवस्था में घरेलू और विदेशी निवेश की सुस्त धारणा को नहीं दर्शाते. 
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि उपभोक्ता विश्वास कमज़ोर है और घरेलू बचत दर में गिरावट के साथ कर्ज़ बढ़ा है. पार्टी का कहना है कि यह ‘आर्थिक बहार’ नहीं है, और सरकार से पूछा कि यह वृद्धि दर आम लोगों के लिए रोज़गार और आय में बेहतरी में क्यों तब्दील नहीं हो रही.

आगे की राह और जोखिम
विश्लेषकों के मुताबिक पहली तिमाही का प्रदर्शन मज़बूत ज़रूर है, लेकिन आगे चुनौतियां बनी रहेंगी. ऊंची कच्चे तेल की कीमतें भारत के लिए अहम हैं क्योंकि देश अपनी ज़्यादातर तेल ज़रूरत आयात से पूरी करता है.
 इसके अलावा कमज़ोर रुपया, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का दबाव आने वाली तिमाहियों में वृद्धि दर को प्रभावित कर सकते हैं. हालांकि बेहतर-से-उम्मीद पहली तिमाही के बाद कुछ अर्थशास्त्री पूरे साल के लिए विकास अनुमान बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं.

 

-ममता सिंह 

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