पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) लागू करने के बाद अब केंद्र सरकार डीजल को भी अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिए हैं कि सरकार डीजल में 15% तक आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) मिलाने की योजना पर काम कर रही है. इस पहल का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बायोफ्यूल उद्योग को प्रोत्साहित करना है.

क्या है आइसोब्यूटेनॉल?

आइसोब्यूटेनॉल एक उन्नत जैव ईंधन (Advanced Biofuel) है.  इसे गन्ना, मक्का, कृषि अवशेष, बांस और अन्य बायोमास से तैयार किया जा सकता है. इसकी ऊर्जा क्षमता एथेनॉल की तुलना में अधिक मानी जाती है और यह डीजल के साथ बेहतर तरीके से मिश्रित हो सकता है. इसके कारण इंजन की कार्यक्षमता पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ने की संभावना रहती है.

सरकार क्यों दे रही है जोर?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है. हर साल तेल आयात पर लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं. यदि डीजल में आइसोब्यूटेनॉल का सफल मिश्रण शुरू होता है, तो इससे आयातित ईंधन की मांग कम हो सकती है. इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी.

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?

आइसोब्यूटेनॉल के उत्पादन के लिए कृषि आधारित कच्चे माल और कृषि अवशेषों का उपयोग किया जा सकता है. इससे किसानों को अपनी फसलों और पराली जैसे अवशेषों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बायोफ्यूल आधारित उद्योगों के विकास से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.

पर्यावरण पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि बायोफ्यूल के अधिक उपयोग से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी. इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है. सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देकर परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करना भी है.

आगे क्या होगा?

डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले इसके तकनीकी परीक्षण, गुणवत्ता मानक, वाहन निर्माताओं की सहमति और आवश्यक नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. यदि यह योजना सफल रहती है तो यह भारत के बायोफ्यूल मिशन का अगला महत्वपूर्ण चरण साबित हो सकती है.

मुख्य बातें

  • डीजल में 15% तक आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण की तैयारी.
  • कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम.
  • किसानों को कृषि अवशेषों से अतिरिक्त आय मिलने की संभावना.
  • प्रदूषण कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर सरकार का फोकस.
  • ऐथनॉल मिश्रण के बाद बायोफ्यूल नीति का अगला चरण माना जा रहा है.
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