भारतीय प्रतिभूति बाजार में वर्ष 2026 में एक बड़ी गिरावट देखी गई है। बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी है। यह बिकवाली सिर्फ 5 महीनों, जनवरी से मई तक में ही 2.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।लगातार बिकवाली भारतीय बाजार पर दबाव बनाए हुए है। जून महीने के पहले 5 दिनों में ही 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी हुई है। भारतीय बाजार में यह निकासी प्रतिदिन औसतन 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की है।
माहवार निकासी के आंकड़े
विदेशी पोर्टफ़ोलियो निवेशकों एवं संस्थागत निवेशकों की निकासी के आंकड़ों में फरवरी माह को छोड़कर अभी तक सभी महीनों में केवल निकासी के आंकड़े दिखाई पड़ते हैं। केवल फरवरी में ही निकासी की जगह खरीदारी के आंकड़े आए हैं।
जनवरी में साल की शुरुआत काफी खराब रही और इक्विटी बाजार से 35,961.8 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जिससे कुल नेट आउटफ्लो 29,070.91 करोड़ रुपये रहा।
फ़रवरी महीने में बाजार में शुद्ध खरीदारी देखी गई। उस महीने कुल 37,847.22 करोड़ रुपये का निवेश आया, जिसमें इक्विटी (22,614.92 करोड़ रुपये) और ऋण बाजार (8,639.27 करोड़ रुपये) का बड़ा योगदान था।
मार्च महीना भारतीय बाजार के लिए सबसे खराब महीना रहा। इस महीने में रिकॉर्ड 1,26,990.99 करोड़ रुपये बाजार से बाहर चले गए। अकेले इक्विटी से 1,17,774.65 करोड़ रुपये निकाले गए।
अप्रैल (70,786.04 करोड़ रुपये), मई (29,918.97 करोड़ रुपये) और जून (37,803.99 करोड़ रुपये) में भी लगातार बिकवाली का सिलसिला जारी है। हालांकि, मार्च के मुकाबले निकासी की रफ्तार थोड़ी धीमी ज़रूर हुई है। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि जून महीने का अभी पहला सप्ताह ही हुआ है। यदि आगे भी बाजार की चाल इसी रफ्तार पर बनी रहती है, तो बाजार में बड़ी गिरावट के संकेत मिल सकते हैं।
प्रतिभूति बाजार, इक्विटी (शेयर) बाजार एवं ऋण बाजार में क्या है अंतर
प्रतिभूति बाजार एक 'अम्ब्रेला टर्म' (व्यापक शब्द) है। यह वह बाजार है, जहां सरकार या कंपनियां पूंजी (पैसा) जुटाने के लिए वित्तीय दस्तावेज (Securities) जारी करती हैं। इक्विटी बाजार और ऋण बाजार दोनों ही इसी प्रतिभूति बाजार के दो बड़े हिस्से (Segments) हैं।
इक्विटी या शेयर बाजार
जब कोई कंपनी अपनी ओनरशिप (मालिकाना हक) का कुछ हिस्सा आम जनता या निवेशकों को बेचकर पैसा जुटाती है, तो उसे इक्विटी बाजार कहते हैं। अगर कंपनी तरक्की करेगी, तो आपके शेयर की कीमत बढ़ेगी और कंपनी अपने मुनाफे का हिस्सा (डिविडेंड) भी आपको देगी। यदि कंपनी घाटे में जाती है, तो आपके शेयरों की कीमत गिर सकती है और आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऋण बाजार
जब सरकारों या कंपनियों को अपनी परियोजनाओं के लिए भारी रकम की जरूरत होती है, लेकिन वे कंपनी की हिस्सेदारी नहीं बेचना चाहतीं, तो वे जनता या संस्थानों से कर्ज लेती हैं। इसके बदले वे बॉण्ड (Bonds) या डिबेंचर जारी करती हैं।
इसमें कंपनी को मुनाफा हो या नुकसान, वह आपको तयशुदा ब्याज देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होती है। इसमें इक्विटी की तरह अचानक बहुत ज्यादा मुनाफा (Multibagger Returns) कमाने का मौका नहीं होता। यह अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है।
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