मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. कांग्रेस ने अनुभवी नेता घनश्याम सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा है. जबकि भाजपा अपने उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के पक्ष में संगठन को एकजुट करने में जुटी हुई है. ऐसे में यह चुनाव अब प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है.

कौन हैं कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह?
घनश्याम सिंह दतिया और सेवढ़ा क्षेत्र की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं. उनका संबंध दतिया के पूर्व राजघराने से है. उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जू देव भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं. घनश्याम सिंह ने 1976 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध किशोरी रमन कॉलेज, मथुरा से अर्थशास्त्र में एमए किया था.उनका मुख्य पेशा कृषि है.72वर्षीय घनश्याम सिंह की पहचान एक शांत, सरल और जमीनी नेता के रूप में होती है. उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.चुनावी हलफनामे के अनुसार उन पर लगभग 1.70 लाख रुपय की वित्तीय देनदारी है.

तीन दशक का राजनीतिक अनुभव 
घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर तीन दशक से अधिक पुराना है. वर्ष 1993 में वह पहली बार दतिया से विधायक चुने गए. इसके बाद 2003 में दोबारा इसी सीट से जीत हासिल की. वर्ष 2018में उन्होंने सेवढ़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे. हालांकि2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से करीब दो हजार वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा. अब कांग्रेस ने उन्हें दतिया उपचुनाव में फिर से मौका दिया है.

दतिया उपचुनाव में कैसे मिली उम्मीदवारी?
दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई. इसके बाद पार्टी ने अनुभवी चेहरे पर दांव लगाने का फैसला किया. 10 जुलाई 2026 को घनश्याम सिंह ने नामांकन फॉर्म खरीदा था, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी. अगले ही दिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी.घनश्याम सिंह ने अपनी प्राथमिकताओं में दतिया में विकास कार्यों को गति देने, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और राजनीतिक कटुता को समाप्त करने की बात कही है.

टिकट बदलने से बढ़ी हलचल
दतिया सीट पर भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आई. मिश्रा समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर कई घंटों तक जाम भी लगाया. हालांकि बाद में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी के निर्णय को स्वीकार करते हुए आशुतोष तिवारी के समर्थन में प्रचार करने की बात कही.

भाजपा ने स्पष्ट किया रुख
भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और डॉ. नरोत्तम मिश्रा की बैठक के बाद भाजपा ने साफ कर दिया कि उम्मीदवार नहीं बदला जाएगा. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि आशुतोष तिवारी ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी रहेंगे और पूरा चुनाव अभियान संगठन की एकजुटता के साथ लड़ा जाएगा.

अनुभव बनाम नया चेहरा
दतिया उपचुनाव में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है. एक तरफ कांग्रेस ने तीन बार के विधायक और लंबे राजनीतिक अनुभव वाले घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है. वहीं दूसरी ओर भाजपा ने अपेक्षाकृत युवा चेहरे आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है. तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)की पृष्ठभूमि से आते हैं और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के पूर्व चेयरमैन भी रह चुके हैं.

जनता की उम्मीदों पर कौन उतरेगा खरा?
अगर दतिया विधानसभा उपचुनाव की बात करें तो पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने अपने करीब दो साल के कार्यकाल में जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, खराब ट्रांसफार्मर, टूटी सड़कों और किसानों के कर्ज व खाद जैसे मुद्दों को प्राथमिकता से उठाया. वहीं कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह तीन बार के पूर्व विधायक हैं, जिनसे जनता को अनुभवी और शांत नेतृत्व की उम्मीद है. दूसरी ओर भाजपा ने 45 वर्षीय आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा हैं.जो लंबे समय तक RSS और संगठन में सक्रिय रहे हैं तथा मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके हैं.अब फैसला दतिया की जनता के हाथ में है कि उसकी उम्मीदों पर कौन खरा उतरता है.

 

"मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. कांग्रेस ने अनुभवी नेता घनश्याम सिंह पर भरोसा जताते हुए …"