देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में असम और पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश के सतना जिले स्थित तीर्थनगरी चित्रकूट भी बाढ़ की चपेट में आ गई है. मंदाकिनी नदी के जलस्तर में भारी वृद्धि के कारण शहर की गलियां कीचड़ और गाद से पट गई हैं, घर और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और कई इलाके अब भी जलमग्न हैं.
बाढ़ ने स्थानीय सुविधाओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. रामघाट को हनुमान धारा से जोड़ने वाला पुल टूट गया है, साथ ही करवी पुल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है. स्थानीय निवासी मनोज कुमार ने एएनआई से बातचीत में बताया कि मलखाना, डेलोरा और गोबरिया जैसे आसपास के गांवों में स्थिति दिल दहला देने वाली है, जहां लोगों की बकरियां, गायें और भैंसें बाढ़ में बह गईं, बच्चों की किताबें-कॉपियां बर्बाद हो गईं और धान-गेहूं जैसा अनाज पूरी तरह खराब हो गया.
'जीवन में ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी': स्थानीय निवासी
एक अन्य निवासी सुरेश पाल ने बताया कि बाढ़ ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है और उन्हें दो दिन से सड़कों पर आवाजाही में भी दिक्कत हो रही है. उन्होंने कहा ‘मैंने अपने जीवन में ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी’, यह टिप्पणी उस त्रासदी की गंभीरता को दर्शाती है जिसने पूरे परिवार को खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर कर दिया. पाल के अनुसार, यह बाढ़ साल 2003 में आई बाढ़ से भी डेढ़ गुना अधिक भीषण है, और दो दिन पहले वे ऐसे फंस गए थे कि नावें भी उन तक नहीं पहुंच पा रही थीं.
प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य
सतना प्रशासन ने चित्रकूट के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्स्थापन कार्य शुरू कर दिया है. स्मार्ट सिटी सतना और नगर निगम की टीमें सफाई अभियान में जुटी हैं, जबकि सफाईकर्मी और अग्निशमन दल सड़कों से गाद हटाने और बुनियादी सेवाएं बहाल करने में लगे हैं.
प्रशासन ने टैंकरों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को भोजन और पेयजल की आपूर्ति भी शुरू कर दी है.
जिला प्रशासन के अनुसार, सतना जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें लगातार बचाव अभियान चला रही हैं.
बीरसिंहपुर में एसडीआरएफ ने अशोक दोहर नामक एक व्यक्ति को बचाया, जो चारों तरफ से पानी से घिर गया था. प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे जलस्तर बढ़ने की स्थिति में अस्थायी शिविरों में शिफ्ट हो जाएं.
व्यापक संकट: उत्तर-पूर्व से मध्य भारत तक
चित्रकूट की यह घटना इस मानसून सीजन में देश के सामने आए व्यापक बाढ़ संकट की एक और कड़ी है. असम में जुलाई से चली आ रही बाढ़ पहले ही सैकड़ों लोगों की जान ले चुकी है और लाखों लोगों को प्रभावित कर चुकी है, जबकि सिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जैसे जिले सबसे बुरी तरह प्रभावित रहे हैं.
वहीं पड़ोसी नेपाल में हाल की बाढ़ ने और भी भयावह रूप लिया है, जहां मृतकों की संख्या 788 तक पहुंच चुकी है और 140 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है.
तीनों घटनाओं को साथ देखें तो यह साफ हो जाता है कि इस साल मानसून की अनियमितता और अचानक आई बाढ़ें देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी तबाही मचा रही हैं, और हर जगह प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां राहत कार्यों में जुटी हैं.
-ममता सिंह
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