भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ शिकायतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है. ऐसे में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) का ऑनलाइन शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म SCORES (SEBI Complaint Redressal System) निवेशकों के लिए अहम भूमिका निभा रहा है.
जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, महीने के दौरान 5,035 नई शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि 5,037 शिकायतों का निपटारा किया गया. इसके बावजूद महीने के अंत तक 5,524 शिकायतें लंबित रहीं.
जून में शिकायतों का क्या रहा हाल?
SEBI के आंकड़ों के अनुसार, 31 मई 2026 तक कुल 5,537 शिकायतें लंबित थीं. जून के दौरान 5,035 नई शिकायतें मिलीं और 5,037 शिकायतों का निपटारा किया गया. इसके बाद 30 जून 2026 तक 5,524 शिकायतें लंबित रहीं. पहली नजर में यह संख्या ज्यादा लग सकती है, लेकिन SEBI ने स्पष्ट किया है कि लंबित शिकायतों में वे मामले भी शामिल हैं, जिनमें संबंधित संस्था समय पर जवाब दे चुकी होती है और निवेशक को समीक्षा का मौका दिया जा रहा होता है. इसलिए सभी लंबित शिकायतों को अनसुलझा मामला नहीं माना जा सकता.
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सिर्फ 4 दिन में कंपनियां दे रही हैं जवाब
रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में संबंधित कंपनियों और संस्थाओं ने शिकायतों पर औसतन 4 दिन में Action Taken Report (ATR) जमा की. वहीं, यदि निवेशक पहले स्तर की समीक्षा का विकल्प चुनता है, तो उस स्तर पर औसतन 8 दिन में जवाब दिया गया.
SCORES 2.0 कैसे करता है काम?
SEBI ने SCORES 2.0 के तहत शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया है.
- शिकायत दर्ज होते ही वह संबंधित संस्था के पास स्वतः भेज दी जाती है.
- संस्था के पास जवाब देने के लिए 21 दिन का समय होता है.
- यदि निवेशक जवाब से संतुष्ट नहीं है, तो वह 15 दिन के भीतर पहली स्तर की समीक्षा मांग सकता है.
- इसके बाद मामला संबंधित संस्था के पास जाता है.
- अगर निवेशक फिर भी संतुष्ट नहीं होता, तो द्वितीय स्तर की समीक्षा का विकल्प मिलता है, जिसमें शिकायत सीधे SEBI देखता है.
- निवेशक चाहे तो Online Dispute Resolution (ODR) का विकल्प भी चुन सकता है.
आम निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
आज करोड़ों लोग शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश उत्पादों में पैसा लगा रहे हैं. ऐसे में यदि किसी ब्रोकरेज, म्यूचुअल फंड, सूचीबद्ध कंपनी या अन्य बाजार मध्यस्थ से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो SCORES निवेशकों को शिकायत दर्ज कराने का आधिकारिक मंच देता है.
जून के आंकड़े बताते हैं कि शिकायतों की संख्या जरूर अधिक है, लेकिन उनका निपटारा भी लगभग उसी गति से हो रहा है. साथ ही, कई शिकायतें केवल इसलिए लंबित दिखती हैं क्योंकि निवेशकों को समीक्षा का अधिकार दिया जाता है. इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निवेशक-केंद्रित बनती है.
"भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ शिकायतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है. ऐसे में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिम…"
