चंडीगढ़: कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद से हटाने का फैसला कर लिया है. लुधियाना से सांसद वड़िंग की जगह किसी नए नेता को प्रदेश की कमान सौंपी जाएगी. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में बैठे नेतृत्व ने अपना यह फैसला वड़िंग तक पहुंचा दिया है.
सूत्रों का कहना है कि वड़िंग को जल्द दिल्ली बुलाया जा सकता है और नए अध्यक्ष की घोषणा किसी भी समय हो सकती है. इस फैसले के साथ पिछले करीब चार महीने से वड़िंग खेमे और उन्हें हटाने की मांग करने वाले नेताओं के बीच चल रही खींचतान का अंत होने की उम्मीद है.
पायलट की रिपोर्ट के बाद फैसला
यह घटनाक्रम पंजाब मामलों के प्रभारी सचिन पायलट के संगठनात्मक फीडबैक के बाद सामने आया है. पायलट ने इसी महीने की शुरुआत में भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी. सूत्रों के अनुसार, पायलट ने नेताओं और जिला पदाधिकारियों के साथ 50 से अधिक बैठकें कीं और उनके आधार पर तैयार रिपोर्ट पर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और के.सी. वेणुगोपाल के साथ चर्चा हुई.
साल में दूसरी बार नेतृत्व पर मंथन
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर इस साल यह दूसरा बड़ा मंथन है. जून और जुलाई में अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव की तिकड़ी ने पर्यवेक्षक के रूप में प्रदेश इकाई का आकलन किया था. सूत्रों के अनुसार, अधिकांश नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के पक्ष में राय दी थी. इसके बावजूद आलाकमान ने वड़िंग को बनाए रखा, चन्नी को प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया और विजय इंदर सिंगला, सुखजिंदर सिंह रंधावा तथा अमर सिंह को अन्य जिम्मेदारियां दीं. मकसद गुटों और समुदायों के बीच संतुलन साधना था.
यह समझौता खींचतान खत्म नहीं कर सका. चन्नी खेमे के मौजूदा और पूर्व विधायकों ने खुलकर बदलाव की मांग की. पायलट की नियुक्ति को भी इसी गतिरोध को सुलझाने की कोशिश के तौर पर देखा गया.
कौन हो सकता है नया अध्यक्ष?
वड़िंग के संभावित उत्तराधिकारियों के तौर पर कई नामों की चर्चा है. इनमें सबसे आगे विजय इंदर सिंगला का नाम बताया जा रहा है. मालवा क्षेत्र से आने वाले सिंगला पूर्व मंत्री और AICC सचिव हैं. उन्हें अक्सर हिंदू चेहरे के रूप में गिना जाता है, जो संगठन की कमान संभालें तो भी स्वतः मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं माने जाएंगे.
गुरदासपुर से सांसद और जट सिख चेहरे सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम भी चर्चा में है. उनके अलावा अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला, जालंधर से विधायक परगट सिंह और राजा सांसी से विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम भी संभावितों की सूची में गिने जा रहे हैं.
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘राहुल गांधी के अलावा किसी को नहीं पता कि नया अध्यक्ष कौन होगा. उन्हें नामों का एक पैनल दिया गया है, जिसमें हर नाम की खूबियां और कमजोरियां बताई गई हैं. अंतिम फैसला उन्हीं का होगा.’
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण
अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाओं में जातीय और क्षेत्रीय गणित हावी है. पंजाब कांग्रेस लंबे समय से जट सिख नेतृत्व, दलित प्रतिनिधित्व और हिंदू संगठनात्मक चेहरे के बीच खिंचती रही है. राज्य में हिंदुओं की आबादी करीब 38 प्रतिशत है और विधानसभा की अधिकांश सीटें मालवा क्षेत्र में हैं.
पार्टी के कुछ नेताओं का तर्क है कि हिंदू चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाने से सिख नेताओं की मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षाएं खुली रहेंगी और 2022 जैसी स्थिति से बचा जा सकेगा, जब प्रदेश अध्यक्ष को ही संभावित मुख्यमंत्री माना जा रहा था. वहीं कुछ नेताओं की चेतावनी है कि जाट सिख अध्यक्ष को हटाने से पार्टी का मूल वोट बैंक नाराज हो सकता है, खासकर तब जब भाजपा ने जाट सिख को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.
कार्यकर्ताओं में बेचैनी
दोआबा क्षेत्र के एक नेता ने कहा, ‘अब समय आ गया है कि नेतृत्व की उलझन सुलझे और किसी योग्य नाम पर मुहर लगे. चुनावी मोड में आने के लिए हमारे पास बहुत कम समय बचा है और कार्यकर्ता बेचैन हो रहे हैं. माकन कमेटी की रिपोर्ट आने पर ही यह मसला निपटा देना चाहिए था. देरी हो चुकी है, लेकिन अब इसे और नहीं टाला जाना चाहिए.’
-ममता सिंह
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