पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को राज्य में कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर, कैश फॉर पॉलिसी और कैश फॉर टेंडर’ मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी. कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि वह मामले में FIR दर्ज कर तुरंत जांच शुरू करे और दो महीने के भीतर जांच की प्रगति व नतीजों की रिपोर्ट अदालत में पेश करे.
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है. आदेश में कहा गया कि पुलिस ने जिस तरह कार्रवाई की है, उससे अदालत संतुष्ट नहीं है, इसलिए जांच CBI को सौंपना उचित समझा गया.
राज्य सरकार और पुलिस को सहयोग के निर्देश
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को निर्देश दिया कि वे निष्पक्ष जांच के लिए CBI को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएं.
ED की सूचना पर कार्रवाई न करने का आरोप
यह मामला अधिवक्ता निखिल सराफ की याचिका पर सुना गया. याचिका में दावा किया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 66(2) के तहत पंजाब सरकार को कुछ सूचनाएं भेजी थीं.
आरोप है कि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अलग-अलग तरह के ‘कैश फॉर’ मामलों से संबंधित इन सूचनाओं पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की.
सुनवाई के दौरान ED की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने भी यही आरोप दोहराया. उन्होंने अदालत को बताया कि ED के जालंधर जोन ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र भेजे थे, लेकिन सरकार ने उन पर कार्रवाई नहीं की.
ट्रांसफर और टेंडर में कथित लेन-देन के आरोप
याचिका के अनुसार, कुछ सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों, सरकारी अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े निजी व्यक्तियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं. इन पर IAS अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और विभिन्न विभागों के अहम पदों पर तबादलों को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं.
इसके अलावा, कुछ बिल्डरों, भूमि डेवलपरों और कारोबारियों को टेंडर, परमिशन और लाइसेंस दिलाने के लिए कथित तौर पर प्रभाव के इस्तेमाल का भी जिक्र है.
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि लोगों को झूठे मामलों में फंसाकर एक संगठित वसूली तंत्र चलाया जा रहा था. याचिका में यह भी कहा गया कि शिकायत का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर पत्रकारों और राजनेताओं के बीच उपलब्ध था.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब CBI इस मामले की जांच करेगी.
-ममता सिंह
"पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को राज्य में कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर, कैश फॉर पॉलिसी और कैश फॉर टेंडर’ मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्…"
