चंडीगढ़, 7 सितंबर: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पंजाब पुलिस हिरासत में एक युवक की कथित पिटाई, टॉर्चर और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों को लेकर संज्ञान लिया है. यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों के साथ पंजाब पुलिस कर्मियों द्वारा बदसलूकी की गई.

क्या है पूरा मामला
शिकायत के मुताबिक, पीड़ित मोहनजीत सिंह, संगरूर ज़िले के सुनाम स्थित शेरों गांव का निवासी है. 2 सितंबर 2026 को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान वह राज्य में नशे (ड्रग्स) की समस्या के खिलाफ विरोध जता रहा था. मुख्यमंत्री का ध्यान खींचने के लिए उसने काली झंडी दिखाई, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया.

शिकायत में आरोप है कि हिरासत के दौरान मोहनजीत सिंह को गंभीर शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा, जिसमें पिटाई, चोटें और बिजली के झटके देना तक शामिल है. यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने जबरन उसका जूड़ा खोला और दाढ़ी-बाल खींचे. 
उसकी मां और बहन के साथ भी कथित तौर पर बदसलूकी की गई. शिकायत में यह दावा भी किया गया है कि कथित पिटाई के दौरान एक वीडियो कॉल की गई, जिसमें सिंह को घायल और अधनंगी हालत में दिखाया गया.

NHRC की कार्रवाई
मामले की सुनवाई NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने की. आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), संगरूर के पुलिस अधीक्षक (SP) और ज़िलाधिकारी (DM) को तत्काल जांच कर दो हफ्ते के भीतर एक विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने का निर्देश दिया है.

कानूनगो ने बताया कि आयोग ने इस शिकायत पर औपचारिक रूप से संज्ञान लेते हुए DGP और मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है, साथ ही ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पीड़ित की मेडिको-लीगल जांच कराने के निर्देश दिए हैं. बाद में आयोग ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की भी मांग की.

आयोग ने यह भी आदेश दिया है कि घटना से जुड़े सभी सबूत, मेडिकल रिकॉर्ड, संबंधित पुलिस थाने का पूरा और बिना एडिट किया गया CCTV फुटेज, पुलिस दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक डेटा, तुरंत सुरक्षित रखे जाएं ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके. साथ ही FIR, हिरासत रिकॉर्ड, पूछताछ में शामिल सभी पुलिसकर्मियों का ब्योरा और पीड़ित के परिवार से जुड़े आरोपों पर भी रिपोर्ट मांगी गई है.

कोर्ट में भी उठी मांग
इस बीच, काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन एडवोकेट वासु रंजन ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस कथित पुलिस बर्बरता के मामले में तत्काल स्वतः संज्ञान (सू-मोटो) लेने की मांग की है.

पंजाब में नशे (ड्रग्स) की समस्या लंबे समय से एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रही है, और राज्य में इसके खिलाफ आम नागरिकों व कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन आम बात रही है. ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम आम आदमी पार्टी सरकार का एक जन-संपर्क अभियान है, जिसमें मुख्यमंत्री सीधे जनता से मिलते हैं. यह शिकायत भाजपा सांसद द्वारा दर्ज कराई गई है, जो इस मामले को सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार बनाम विपक्ष के राजनीतिक दायरे में भी ले आती है.

 

-ममता सिंह 

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