चंडीगढ़: 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा फेरबदल किया है. पार्टी ने अपनी सबसे ऊंची निर्णायक इकाई मानी जाने वाली 10 सदस्यीय पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) में मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को शामिल किया है.
साथ ही पंजाब मामलों के सह-प्रभारी और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को भी इस कमेटी में जगह दी गई है.
गौरतलब है कि भगवंत मान अब तक मुख्यमंत्री होने के नाते PAC में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल होते थे, लेकिन अब उन्हें कमेटी का स्थायी सदस्य बना दिया गया है. इससे पार्टी की सर्वोच्च नीति-निर्धारण संस्था में पंजाब सरकार की सीधी और स्थायी भागीदारी सुनिश्चित हो गई है.
नेशनल एग्जीक्यूटिव से तीन बड़े चेहरे बाहर
इस फेरबदल में सबसे चर्चित बदलाव यह रहा कि AAP पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा, जगरांओं की विधायक सरवजीत कौर मानुके और तलवंडी साबो की विधायक बलजिंदर कौर को पार्टी की 23 सदस्यीय नेशनल एग्जीक्यूटिव से हटा दिया गया है.
इन तीनों की जगह मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुम्मन और विभव कुमार को नेशनल एग्जीक्यूटिव में शामिल किया गया है.
गौर करने वाली बात यह है कि राजबीर घुम्मन का नाम हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर एंड लैंड फ्रॉड’ जांच में सामने आया था, जिसने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी थी. ऐसे समय में उन्हें पार्टी के शीर्ष निकाय में शामिल किया जाना कई सवाल खड़े कर सकता है.
चुनावी रणनीति में पंजाब नेतृत्व की बढ़ती भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन बदलावों से साफ संकेत मिलता है कि आगामी चुनाव में उम्मीदवारों के चयन, प्रचार रणनीति और चुनावी फैसलों में पंजाब के स्थानीय नेतृत्व की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ने वाली है. भगवंत मान की PAC में स्थायी सदस्यता से पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद जताई जा रही है.
पंजाब इस समय AAP के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम है. दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद पंजाब पार्टी की एकमात्र बड़ी राज्य सरकार है और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की साख का मुख्य आधार भी यही राज्य बना हुआ है.
2022 जैसा प्रदर्शन दोहराना बड़ी चुनौती
2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 117 में से 92 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था. लेकिन इस बार पार्टी को सत्ता विरोधी लहर, कर्मचारी संगठनों के आंदोलन और कांग्रेस, भाजपा तथा शिरोमणि अकाली दल जैसे विपक्षी दलों की चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है. बेरोजगारी, नशे की समस्या और सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है, जिनका जवाब देना पार्टी के लिए जरूरी होगा.
सत्येंद्र जैन की PAC में एंट्री को पंजाब संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. कुल मिलाकर, यह फेरबदल इस बात का संकेत है कि AAP आगामी पंजाब चुनाव को हल्के में नहीं ले रही और भारी जनादेश के बावजूद संगठन को नए सिरे से मजबूत करने में जुटी है.
-ममता सिंह
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