रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही सबसे पहले यात्री क्या देखते हैं? पीने का पानी, साफ शौचालय, बैठने की जगह और धूप-बारिश से बचने के लिए शेल्टर. लेकिन अगर यही सुविधाएं स्टेशन पर न मिलें, तो सफर शुरू होने से पहले ही परेशानी बढ़ जाती है.
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों की सुविधाओं को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं. सीएजी ने देश के 16 रेलवे जोन के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया. इनमें से 458 स्टेशन यानी करीब 89 फीसदी स्टेशनों पर एक या उससे ज्यादा जरूरी यात्री सुविधाओं की कमी मिली.
यानी सिर्फ 54 स्टेशन ही ऐसे थे, जहां न्यूनतम जरूरी सुविधाओं में कोई कमी नहीं मिली.
बड़े स्टेशन भी नहीं बचे
खास बात यह है कि कमी सिर्फ छोटे स्टेशनों तक सीमित नहीं है. नई दिल्ली, हावड़ा, मुंबई सेंट्रल, सीएसएमटी, अहमदाबाद, चेन्नई सेंट्रल और सिकंदराबाद जैसे बड़े स्टेशन भी इससे अछूते नहीं हैं.
इन स्टेशनों पर भी यात्रियों को कई जरूरी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है. कहीं पीने के पानी के नल कम हैं, तो कहीं शौचालय और मूत्रालय पर्याप्त नहीं हैं. इसके अलावा कई जगह पंखे, कूलर और साइन बोर्ड जैसी सुविधाएं भी कम मिलीं.
वहीं, रेलवे के लिए करोड़ों रुपये की कमाई करने वाले टॉप-10 स्टेशनों में भी ऐसी कमियां दर्ज की गई हैं. इन स्टेशनों पर हर दिन बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं. ऐसे में सुविधाओं की कमी का असर सीधे यात्रियों पर पड़ता है.
बारिश हो या तेज धूप, यात्री परेशान
स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करना अपने आप में लंबा हो सकता है. लेकिन अगर बैठने की जगह या पर्याप्त शेल्टर न हो, तो परेशानी और बढ़ जाती है.
बारिश के दौरान यात्री भीगने से बचने के लिए जगह तलाशते हैं. वहीं तेज धूप में उन्हें गर्मी के बीच ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है. सीएजी की जांच में 21 स्टेशनों पर प्रतीक्षालय तक नहीं मिला.
इसके अलावा 138 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी पाई गई. 111 स्टेशनों पर मूत्रालय और 59 स्टेशनों पर शौचालय तय मानकों से कम मिले.
पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल
सिर्फ पानी की उपलब्धता ही नहीं, उसकी गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है.
रिपोर्ट के मुताबिक कई स्टेशनों पर पानी की नियमित जांच नहीं की गई. कुछ जगहों पर पानी में क्लोरीन का स्तर तय मानकों से कम या ज्यादा पाया गया.
वहीं, कई स्टेशनों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया भी मिले. दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड जंक्शन से लेकर दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन और मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस समेत कुछ अन्य स्टेशनों के वाटर कूलरों के नमूनों में ई-कोलाई पाया गया.
ऐसे में सवाल सिर्फ सुविधा का नहीं, यात्रियों की सेहत का भी है. दूषित पानी से संक्रमण और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
रेलवे ने क्या कहा?
सीएजी की रिपोर्ट सामने आने के बाद रेल मंत्रालय ने कहा है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले की समीक्षा की है.
मंत्रालय के मुताबिक सुरक्षित पेयजल को लेकर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही बोर्ड स्तर से इसकी सीधी निगरानी भी की जाएगी.
रेलवे बोर्ड ने साल 2018 में सभी स्टेशनों पर न्यूनतम जरूरी यात्री सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे. लेकिन करीब सात साल बाद भी सीएजी की रिपोर्ट में बड़ी संख्या में स्टेशनों पर इन सुविधाओं की कमी सामने आई है.
ऐसे में अब सवाल यही है कि रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही वाले रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाएं कब तक पूरी तरह उपलब्ध होंगी?
"रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही सबसे पहले यात्री क्या देखते हैं? पीने का पानी, साफ शौचालय, बैठने की जगह और धूप-बारिश से बचने के लिए शेल्टर. लेकिन…"
