नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की लंबे समय से चर्चा में रही आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love) को लेकर भारत में प्रकाशन अधिकारों की लड़ाई अब खत्म हो गई है.
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) के हाथ खींचने के करीब एक हफ्ते बाद हार्परकॉलिंस इंडिया ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वह इस किताब का भारतीय संस्करण प्रकाशित करेगा.
क्या है पूरा मामला
सोनिया गांधी की यह किताब अमेरिका में अल्फ्रेड ए नॉफ (Alfred A. Knopf), जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक प्रकाशन प्रभाग है, द्वारा 10 नवंबर को वैश्विक स्तर पर रिलीज़ की जानी है. नॉफ ने किताब का शुरुआती प्रिंट रन एक लाख प्रतियों का रखा है, जो इसे इस साल के सबसे बड़े राजनीतिक प्रकाशनों में से एक बनाता है.
भारत में इस किताब को छापने की ज़िम्मेदारी शुरू में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के पास थी, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी ने पीछे हटने का फैसला किया. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रकाशक ने पांडुलिपि के कुछ हिस्सों में बदलाव और कटौती की मांग की थी, जिसे सोनिया गांधी ने खारिज कर दिया.
किन हिस्सों पर था विवाद
रिपोर्टों में कहा गया है कि पेंगुइन इंडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और चीनी घुसपैठ से जुड़े संदर्भों को हटाना या संपादित करना चाहता था. इनमें कथित तौर पर 2004 में गुजरात की एक रैली में सोनिया गांधी को लेकर की गई एक टिप्पणी का ज़िक्र भी शामिल था.
सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी ने साफ कर दिया था कि यह उनकी अपनी कहानी है और इसमें किसी तरह की विकृति स्वीकार नहीं की जाएगी.
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने हालांकि इस बात से इनकार किया कि उसने संपादकीय मतभेदों के चलते किताब छापने से इनकार किया, और कहा कि वह अब भी इसे प्रकाशित करने के लिए ‘इच्छुक’ है.
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने जल्द ही राजनीतिक रंग ले लिया. कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार प्रकाशकों पर दबाव बना रही है. कांग्रेस के लोकसभा उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि पेंगुइन ‘मोदी और RSS पर किताबें छापने में खुश’ रहता है, लेकिन सोनिया की किताब में बदलाव चाहता है. अशोक गहलोत और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी पेंगुइन की आलोचना की.
दूसरी ओर, बीजेपी की डिजिटल टीम के पूर्व प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि अगर किसी प्रकाशक को खुद अपनी लेखिका की आत्मकथा को ‘फैक्ट-चेक’ करने की ज़रूरत पड़ रही है, तो सवाल यह है कि दिक्कत यादों में है या तथ्य और कल्पना की धुंधली रेखा में.
अब हार्परकॉलिंस के हाथ में कमान
पेंगुइन के हटने के बाद कई बड़े प्रकाशक इस किताब के भारतीय अधिकार हासिल करने की दौड़ में शामिल हो गए थे. अब हार्परकॉलिंस इंडिया ने इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिए पुष्टि की है कि वह बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव को 10 नवंबर 2026 को भारत में प्रकाशित करेगा.
कंपनी ने इसे ‘हमारे समय की सबसे प्रतीक्षित राजनीतिक आत्मकथाओं में से एक’ बताया है, जो प्रेम, पहचान, कर्तव्य और अपनेपन की एक व्यक्तिगत कहानी है और भारत की यात्रा को एक भीतरी नज़रिए से पेश करती है.
किताब में क्या है
सोनिया गांधी ने इस मेमॉयर को अपने परिवार, अनुभवों और छह दशकों में देखे गए राजनीतिक व सामाजिक बदलावों का व्यक्तिगत विवरण बताया है. प्रकाशक के मुताबिक, यह किताब उनके इटली में बचपन से लेकर भारत आने, राजीव गांधी से विवाह और भारतीय राजनीति में उनके लंबे सफर तक की कहानी बयां करेगी.
-ममता सिंह
"नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की लंबे समय से चर्चा में रही आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love) को लेक…"
